बवालियों और सवालियों के बीच का जो बड़ा सा हिस्सा है, वही असल "हिन्दुस्तान" है


फेसबुक पूछता है कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है। देश में सड़क से लेकर संसद तक राजनीति बजबजा रही है। बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष चोर सिपाही खेलते हुए संसदीय मर्यादा का पिंडदान कर रहे हैं। दोनों एक दूसरे को चोर बता रहे हैं। वैसे जबतक क्लियर नहीं होता कि चोर कौन है, तब तक मान लेता हूँ कि मैं ही चोर हूँ।


यूपी में योगी प्रेम के नाम पर फंसा कर हत्या करने वालों के विरुद्ध कानून बना रहे हैं तो राजस्थान वाले मुख्यमंत्री को बुरा लग रहा है। वे सोचते हैं कि क्या हो गया जो कुछ हिन्दू लड़कियां मार डाली जाती हैं, सेक्युलरिज्म के आगे इन लड़कियों का क्या मोल... विधर्मियों की सहायता से सत्ता की मलाई चाँपने वालों ने लड़कियों को हमेशा वस्तु ही समझा है। कल का सच आज भी सच बना हुआ है, और फेसबुक मुझसे पूछता है कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है..


उधर दिल्ली की सड़कों पर शाहीनबाग वाली टीम किसान बन कर "इंदिरा को ठोका था अब मोदी को ठोकेंगे" के नारों के साथ उतरी है, और इधर मेरे बिहार के किसानों को पता भी नहीं कि टीवी पर चल रहा आंदोलन आखिर हो क्यों रहा है। आजादी के बाद से ही भारत में किसानों की समस्या केवल विपक्ष को समझ में आती है, सत्ता को कभी समस्या दिखती ही नहीं। साफ साफ कहें तो किसान हमेशा विपक्ष के हथियार के रूप में यूज होते रहे हैं, जिन्हें सत्ता पाते ही कूड़ेदान में फेंक देने की परम्परा रही है। कुछ नया कहाँ हो रहा है? विपक्ष का लक्ष्य स्पष्ट होता है कि किसी भी मूल्य पर सत्ता लेनी है, पर सत्ता का पत्ता जल्दी नहीं खुलता। हम भी देखते हैं कि कब खुलता है...


चार दिन पहले बिहार विधानसभा के लिए चुन कर आये पाँच विधायकों ने हिंदुस्तान के नाम की शपथ लेने से इनकार कर दिया। उन्हें न सम्प्रदाय के नाम पर देश को तोड़ कर बने पाकिस्तान से दिक्कत है, न बंग्लादेश से परेशानी है। उन्हें हिन्दू से दिक्कत है, हिंदुस्तान से दिक्कत है। और फेसबुक मुझसे पूछ रहा है कि आपके दिमाग में क्या चल रहा है...पर रुकिये! इसी बीच योगी महाराज हैदराबाद जा कर कह आये कि हैदराबाद का नाम बदल कर भाग्यनगर कर देंगे। योगी आदित्यनाथ नाम बदलने में माहिर हैं, सम्भव है कल असदुद्दीन ओवैसी का नाम बदल कर अशोक जोशी कर दें। भारत में नाम बदलना नया नहीं है, बहुतों ने एक बोरे चावल के लिए अपना धर्म बदल दिया है। खैर... मुझे इस बदलाव की चिंता नहीं है, मैं तो यह सोच रहा हूँ कि फेसबुक को क्या बताऊँ कि मेरे मन में क्या चल रहा है...


जब देश की सड़क से लेकर सदन तक राजनीत बजबजा रही हो तो जनता के दिमाग में क्या चलेगा भाई? कुछ नहीं चल रहा। यह देश सचमुच विविधताओं से भरा हुआ है। कुछ लोग पिछले हजार वर्षों से केवल बवाल कर रहे हैं, और कुछ लोग अपने घरों में बैठ कर केवल सवाल कर रहे हैं। इन बवालियों और सवालियों के बीच का जो बड़ा सा हिस्सा है, वही असल हिन्दुस्तान है जो हर साल थोड़ा छोटा हो जा रहा है। शेष तो जो है सो हइये है...


सर्वेश तिवारी श्रीमुख


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