व्यर्थ पूछते हैं

 


किसी भक्त का महाराज जी को प्रश्न और उनका उत्तर:

प्रश्न: (प्रसंग) पारिजात' विधि भक्त पूछते हैं। 

उत्तर: बहुत शुद्ध जीव होगा वही कर सकता है, सब नहीं कर सकते। 

व्यर्थ पूछते हैं।

इसमें कहीं ना कहीं महाराज जी हम सबके के लिए बहुत महत्वपूर्ण सन्देश दे रहे हैं। 

मन्त्रों के उच्चारण का, अपनी भक्ति का फल मिलने के लिए:

हमारे मन का शुद्ध होना आवश्यक है, राग-मोह और द्वेष से ऊपर उठकर,

महाराज जी में, परमात्मा में (या जिस भी देवी- देवता को हम मानते हों) - समर्पण की भावना को भी लाना भी आवश्यक होता है।  

अतः वर्तमान में इस मार्ग पर चलने की इच्छुक लोग -महाराज जी द्वारा बताये गए परमार्थ और परस्वार्थ के मार्ग पर सच्चे मन से चलने का प्रयत्न करें -बिना किसी दिखावे के। यदि इच्छाशक्ति और धैर्य दोनों ने साथ दिया तो, सही समय पर महाराज जी स्वयं मार्गदर्शन करेंगे।  महाराज जी अपने भक्तों की खोज-खबर रखते हैं। 

महाराज जी की कृपा सब भक्तों पर बनी रहे।

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