स्मरण रखो कि कभी भी मृत्यु हो सकती है इससे पाप वृत्ति का उदभव नहीं होगा

 


जीवन को उजागर करना हो तो जो समय बीत गया उसका स्मरण मत करो भविष्य का विचार भी मत करो केवल वर्तमान को सुधारो समय बहुत कम है जितना अधिक हो सके प्रभु का स्मरण करो। 

भजन के लिए अनुकूल समय की प्रतीक्षा न करो कोई भी क्षण भजन के लिए अनुकूल है हर पल ये स्मरण रखो कि कभी भी मृत्यु हो सकती है इससे पाप वृत्ति का उदभव नहीं होगा।

लौकिक रस के भोगी को प्रेमरस नहीं मिलता, भक्तिरस भी नहीं मिलता जिसने काम का त्याग किया है वही रसिक है जगत का रस कटु है प्रेमरस ही मधुर है।

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