गुरूद्वारा नाका हिन्डोला में श्रद्धा के साथ मनाया गया खालसा पंथ का साजना दिवस ‘‘बैसाखी पर्व’’

लखनऊ। शासन द्वारा जारी कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार सैनिटाइजिंग, मास्क एवं सोशल डिस्टेन्सिग प्रोटोकाल का पालन करते हुए खालसा पंथ का साजना दिवस (बैसाखी पर्व) ऐतिहासिक गुरूद्वारा, नाका हिन्डोला, लखनऊ में श्रद्धा एवं सादगी के साथ मनाया गया।
 
 
गुरूद्वारा साहिब का भव्य दीवान हाल बहुत खूबसूरती से सजाया गया था। दीवान हाल के बीचो-बीच फूलों से सुसज्जित सुन्दर संगमरमर की पालकी साहिब में श्री गुरू ग्रन्थ साहिब का प्रकाश किया गया था। श्री अखण्ड पाठ की समाप्ति के पश्चात हजूरी रागी भाई राजिन्दर सिंह ने अपनी मधुर वाणी में अमृतमयी पवित्र आसा दी वार एवं "खालसा मेरो रुप है खास खालसे महि हौं करौ निवास" शबद कीर्तन गायन कर वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
 
 
ज्ञानी सुखदेव सिंह ने बैसाखी का ऐतिहासिक पक्ष बताते हुए संगतो को बताया कि 1699 को आनंदपुर साहिब की पावन धरती पर साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने खालसा पंथ की साजना आज ही के दिन की थी सबसे पहले गुरु गोविंद सिंह जी महाराज ने पांच प्यारों को अमृत छका कर खालसा पंथ में प्रवेश कराया था। ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के चरणों में सरबत के भले एवं कोरोना बीमारी से छुटकारे की अरदास की।
 
 
अरदास के उपरान्त उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम का संचालन सतपाल सिंह मीत ने किया। लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष सरदार राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने सभी नगरवासियों को बैसाखी पर्व पर हार्दिक बधाई देते हुए अपील की कि करोना बीमारी में सरकार द्वारा दिये गये निर्देशों का पालन करें।
 

बैसाखी के उपलक्ष में पिछले 10 दिन से चल रहे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के सहज पाठ की जिन बच्चों और भाइयों बहनों ने पाठ की सेवा की थी, उन सबको गुरुद्वारा साहब की तरफ से पाठ करने वाली महिलाओं और बच्चों को अध्यक्ष महोदय द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। महामंत्री हरमिन्दर सिंह टीटू एवं हरविन्दरपाल सिंह नीटा की देखरेख में दो-दो गज की दूरी की पंक्तियों में गुरू का लंगर वितरित किया गया।

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