बलरामपुर अस्पताल के कोविड आई0सी0यू0 वार्ड का किया गया  निरीक्षण



लखनऊ : कोविड-रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में आज प्रभारी अधिकारी कोविड 19 लखनऊ डा0 रोशन जैकब द्वारा बलरामपुर अस्पताल एवं कैसर इंस्टिट्यूट का निरीक्षण किया गया प्रभारी अधिकारी द्वारा सबसे पहले बलरामपुर स्थित वैक्सीनेशन सेन्टर का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बलरामपुर अस्पताल के निदेशक द्वारा बताया गया कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के एवं 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन अलग-अलग बूथ बनाकर किया जा रहा है। प्रभारी अधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि वैक्सीनेशन कराने आये किसी भी व्यक्ति को कोई असुविधा न होने पाये और कोविड प्रोटोकाल, सोशल डिस्टेन्सिंग एवं मास्क आदि का पूर्ण रुप से अनुपालन कराया जाये। निरीक्षण में वैक्सीनेशन सुचारु रुप से होता पाया गया। प्रभारी अधिकारी द्वारा बलरामपुर अस्पताल के निदेशक से वैक्सीन की उपलब्धता के सम्बन्ध में जानकारी मागी गई जिसके सम्बन्ध में निदेशक द्वारा बताया गया कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है, प्रतिदिन आने वाले सभी लोगों का वैक्सीनेशन किया जा रहा हैं। जिसके पश्चात् प्रभारी अधिकारी द्वारा वैक्सीनेशन कराने आये लोगों के साथ संवाद किया गया और उनका उत्साह वर्धन किया गयां। साथ ही उनसे अपील भी की गई कि वह वैक्सीनेशन कराने के बाद वे अपने परिवार और अपने परिचितों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि इस महामारी को जड़ से खत्म किया जा सके। 

वैक्सीनेशन सेन्टर के निरीक्षण के पश्चात् प्रभारी अधिकारी बलरामपुर अस्पताल के कोविड आई0सी0यू0 वार्ड में पहुंची और वहां कोविड रोगियों को उपलब्ध कराये जा रहे उपचार का जायजा लिया। प्रभारी अधिकारी द्वारा कोविड वार्ड में स्थित रोगियों से संवाद किया गया और उपलब्ध कराये जा रहे उपचार के सम्बन्ध में फीडबैक लिया गया। निरीक्षण में संज्ञान में आया कि हाईफ्लो आक्सीजन वार्ड का उपयोग सही प्रकार से नहीं किया जा रहा है, कुछ रोगियों को जिनको हाईफ्लो आक्सीजन की आवश्यकता है उनका उपचार भी नार्मल फ्लो पर होता पाया गया जिसके सम्बन्ध में पूछने पर निदेशक बलरामपुर अस्पताल द्वारा बताया गया कि ऑक्सीजन पाईप लाइन सही नही है। जिसके कारण वार्ड में ऑक्सीजन का फ्लो कम है। जिसके लिए प्रभारी अधिकारी द्वारा नाराज़गी व्यक्त की गई और निर्देश दिया कि तत्काल ऑक्सीजन पाईप लाइन को सही कराया जाए और तब तक हाई फ्लो ऑक्सीजन वार्ड को सक्रिय करके  रोगी को  वार्ड में शिफ्ट कराया जाए। प्रभारी अधिकारी द्वारा अस्पताल को उपलब्ध कराये गये 100 आक्सीजन कन्संट्रेटर (10लीटर) के सम्बन्ध में भी जानकारी मांगी गई। जिसके सम्बन्ध में निदेशक बलरामपुर अस्पताल द्वारा बताया गया कि 50 आक्सीजन कंसंट्रेटर का एक अलग से एक वार्ड बनाया गया है जहां कम आक्सीजन फ्लो की आवश्यकता वाले रोगियों का उपचार किया जाता है और 50 कंसंट्रेटरों का उपयोग ऐसे बेडों पर किया जा रहा है जहां आक्सीजन की लाइन नहीं है। जिसके लिए प्रभारी अधिकारी द्वारा मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देश दिया गया कि कल एक टीम भेज कर 100 ऑक्सीजन कन्सन्ट्रेटरो का प्रयोग कहाँ कहा किया जा रहा है उसका सत्यापन कराया जाए। प्रभारी अधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि कोविड रोगियों के उपचार में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाये और उन्हें उच्च उपचार उपबब्ध कराना सुनिश्चित कराया जाये।

उक्त के पश्चात् प्रभारी अधिकारी गढ़ी कनौरा स्थित कैसर इंस्टिट्यूट पहुंची। प्रभारी अधिकारी द्वारा कैसर इंस्टिट्यूट स्थित कोविड वार्ड का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में प्रत्येक रोगी की मानिटरिंग इन्ट्रीगेटेड कन्ट्रोल रुम द्वारा होती पाई गयी।  अस्पताल के द्वारा रोगियों को अच्छा उपचार होता पाया गया। प्रभारी अधिकारी द्वारा पीपरहट आक्सीजन प्लान्ट से समन्वय स्थापित कराकर अस्पताल को आक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करायी गयी। 

प्रभारी अधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि कोविड रोगियों के उपचार में किसी भी प्रकार की शिथिलता को बर्दाश नहीं किया जायेगा। सभी अस्पताल रोगियों को उच्च उपचार उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराये। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया गया कि वह औषधि निरीक्षक को निर्देशित करें कि वह आर0एस0एम, लोकबन्धु एवं बलरामपुर अस्पताल को निर्बाध आक्सीजन की सप्लाई उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराए।

उक्त के पश्चात् प्रभारी अधिकारी अवध शिल्प ग्राम स्थित डी0आर0डी0ओ0 द्वारा निर्मित अटल बिहारी वाजपेई कोविड अस्पताल पहुंची। प्रभारी अधिकारी द्वारा कन्ट्रोल रुम में सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से कोविड रोगियों का उपचार होते देखा गया। प्रभारी अधिकारी द्वारा बताया गया कि कमाण्ड सेंटर से रोगियों को सिविएरिटी के आधार पर भर्ती किया जाए।

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