हम अगर किसी और की मदद करते हैं तो इसे एहसान न मानते हुए अपना कर्तव्य समझना चाहिए



जब हम किसी दूसरे से कोई सहायता/ सहयोग प्राप्त करते हैं तो हमें भी इस मदद को स्मरण रखते हुये यथाशक्ति और शालीनता पूर्वक लौटाने का ध्यान रखना चाहिए।

साथ ही हम अगर किसी और की मदद करते हैं तो इसे एहसान न मानते हुए अपना कर्तव्य समझना चाहिए इस प्रकार का व्यवहार जीवन में आपसी सामंजस्य और स्नेह को बढ़ावा देकर अहंकार को नष्ट कर देता है।

हम अगर दूसरे की खुशियो में अपनी खुशी ढूँढते हैं तो हम हमेशा खुश और सुखी रह सकते हैं।

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