हे ईश्वर तूने बहुतो से मुझे अच्छा बनाया



एक अँधा था और हाथ पैर से लुंज भी था वह बोला, हे ईश्वर तूने बहुतो से मुझे अच्छा बनाया एक ने पूछाअरे तू अँधा है और हाथ पैर से लुंज भी है, तू कैसे कहता है की बहुतो से अच्छा हूँ वह बोला- ईश्वर ने मुझे ऐसा दिल दिया है की जिसमे मै उसे याद करता हूँ  यह दिल उसने बहुतो को नहीं दिया। 

जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने का बहुत महत्वपूर्ण सन्देश महाराज जी दे रहे हैं हम सबको अपने इस उपदेश के निमित्त

परमात्मा और महाराज जी के प्रति सच्चे भाव होने के लिए ये आवश्यक नहीं है कि वर्तमान में हम हर तरीके से सक्षम ही हों महाराज जी द्वारा बताए गए इस उदाहरण में तो इस अंधे व्यक्ति की अवस्था संभवत अस्थायी भी नहीं लगती है -जैसे हममें से बहुतों की समस्याएं होती हैं। 

पूर्व जन्मों के में किये गए कर्मों के वजह से इस व्यक्ति का जन्म संभवतः इन परिथितियों में हुआ है परन्तु कुछ अच्छे कर्मों की वजह से इस व्यक्ति ने ऐसा दिल भी पाया है जिसमें परत्मात्मा के लिए सच्चे भाव हैं जो बहुत लोगों के नहीं होते। आँखों के ना होने पर भी संभवतः वह दूसरों पर कम से कम निर्भर हो या ना हो दूसरों की मदद भी करता हो अपने सामर्थ अनुसार और इस व्यक्ति को अपनी दशा के लिए परमात्मा से कोई शिकायत भी नहीं लगती, जैसा की हममें से बहुतों को मुसीबत से समय होती है शायद इसलिए क्योंकि यह व्यक्ति आध्यात्मिक रूप से जागृत है।

ऐसे  सच्चे भाव ही हमें इस बात की समझ देते हैं की हमारी वर्तमान स्तिथि (अगर किसी भी प्रकार से संघर्षपूर्ण है), हमारे पूर्व कर्मों का ही फल है, इनको भोगने में हमारा कल्याण है और परमात्मा/सद्गुरु की कृपा से इसका सामना करने की शक्ति भी मिलती है ये अटल सत्य है। इसका साक्षात्कार हममें से कई भक्तों को हुआ भी होगा और सकारात्मक रहने से, सकारात्मक रहने की कोशिश से जीवन का कठिन समय काटना भी थोड़ा कम कठिन हो जाता है।

इस जन्म में शरीर छोड़ने (मृत्यु ) के बाद- अगर इस अंधे व्यक्ति की आत्मा का विलय उस परम आत्मा नहीं हो पाता है तो भी,  अपने अच्छे कर्मों से वजह से इसका अगला जन्म बहुत ही बेहतर हालातों में होगा

इसीलिए हमें महाराज जी उपदेशों के अनुसार परमार्थ और परस्वार्थ के मार्ग पर चलने की ईमानदार कोशिश तो करनी ही चाहिए अपने ही भविष्य को सुरक्षित करने के लिए, सुखी करने के लिए महाराज जी के उपदेशों पर चलने का प्रयत्न जीवन की किसी भी परिस्थितियों में किया जा सकता है सब हमारे भाव का खेल है। 

महाराज जी सबका भला करें।

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