बहराइच पुलिस के लिए कोई मायने नहीं रखता उच्च न्यायालय का आदेश


बहराइच। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जबाबदेही को लेकर राजधानी में चाहे जितनी बड़ी-बड़ी बातें करें लेकिन जमीन पर उनकी प्रतिबद्धताओं को नौकरशाही और पुलिस जमींदोज करने में लगी रहती है।

मामला राजधानी से 125 - 130 किलोमीटर दूरी पर स्थित बहराइच जिले का है, जहां 08 मार्च 2021 को बहराइच पुलिस के टिवटर एकाउंट से सोनापति सिंह के 24/03/2017 को पुलिस अधीक्षक को प्रेषित प्रार्थनापत्र पर दिये गये उत्तर में यह कहा गया था कि उनका प्रार्थनापत्र प्रधान लिपिक को स्थांतरित कर दिया गया है लेकिन अभी तक उनके प्रार्थनापत्र पर क्या कार्रवाई हुई, यह बताने में बहराइच पुलिस का कार्यालय विफल साबित हो रहा है. जब पुलिस अधीक्षक को इस मामलें में जानकारी लेने के लिए 19 जून को फोन किया गया तो उनका फोन नहीं उठा। बताते चले कि सोनापति सिंह ने अपने पति स्वर्गीय इन्द्र बहादुर सिंह, सेवानिवृत्ति उप निरीक्षक, श्रीनगर कालोनी, मडियांव, लखनऊ के शासनादेश के अनुसार दिनांक 01-01-2006 से पेंशन / पारिवारिक पेंशन संशोधित करने के सम्बंध में यह प्रार्थनापत्र दिया था।

इस संदर्भ में स्व.इन्द्र बहादुर सिंह ने अपने जीवित रहते शासनादेश सं 4/2016-308/97/टी.सी./  दिनांक 21/01/2006 की छायाप्रति संलग्न करके दिनांक 04/04/2016 और 24/05/2016 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बहराइच के समक्ष प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया था। इस संदर्भ में मा. उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ द्वारा 14 /02 /2017 को पारित आदेश का संदर्भ देकर 28/07/2017 को सहायक लेखाधिकारी मुख्यालय, नि. वित्त नियंत्रक मुख्यालय, उत्तर प्रदेश और 01/09/2017 को वित्त नियंत्रक उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय, इलाहाबाद ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को स्व.इन्द्र बहादुर सिंह के प्रार्थनापत्र को निस्तारित करने के लिए निर्देश दिया था लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इससे साफ जाहिर है कि बहराइच पुलिस को मा.उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ के आदेश का संदर्भ ग्रहण करवाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा दिये गये निर्देशों की कोई परवाह नहीं है और प्रार्थनापत्र देते - देते पीड़ित इन्द्र बहादुर सिंह ने यह संसार छोड़ दिया।

यह एक तरह से हत्या है जिसकी जिम्मेदार बहराइच पुलिस के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार है, जो मा.उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करवाने में विफल है जिससे 'कानून का राज्य' पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। अब सवाल यह है कि सोनापति सिंह पत्नी स्वर्गीय इन्द्र बहादुर सिंह के प्रार्थनापत्र पर कब कार्रवाई होगी जिससे उनके अवशेष देयों का भुगतान हो सकें। इसके अलावा मा.उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ के आदेश का संदर्भ ग्रहण करवाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय के निर्देशों का बहराइच पुलिस ने 04 साल तक अनुपालन नहीं किया जिसके लिए कब उत्तरदायित्व निर्धारित किया जायेगा? इसके अलावा अपने अवशेष देयों के भुगतान को जीवित रहने तक न प्राप्त कर पाने वाले स्व. इन्द्र बहादुर सिंह और फिर पिछले 04 सालो से यह भुगतान प्राप्त कर पाने में वंचित उनकी पत्नी सोनापति सिंह की जो हानि हुई, अपने पति की मृत्यु जैसी त्रासदी का सामना करना पड़ा उसकी क्षतिपूर्ति कैसे और कब होगी?

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