श्रीराम निर्माण में विलंब का कारण भाजपा नेताओं की चंदा चोरी- संजय सिंह

लखनऊ। बीजेपी के नेताओं को अयोध्‍या में सर्किल रेट से कम दाम में जमीन मिल जा रही है, लेकिन उसी जगह ट्रस्‍ट को चार से बारह गुना ज्‍यादा कीमत पर जमीन मिल रही है। डेढ़ साल में मंदिर निर्माण आगे न बढ़ पाने के पीछे अगर कोई कारण है तो वह भाजपा नेताओं और ट्रस्‍ट के सदस्‍यों की चंदा चोरी है।

सोमवार को ये बातें आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रदेश कार्यालय पर प्रेसवार्ता में कहीं। उन्‍होंने कहा कि खुद को रामभक्‍त बताने वाले भाजपा नेता कैसे रामभक्‍त हैं, सबने देख लिया। प्रभु श्रीराम के मंदिर के नाम पर भ्रष्‍टाचार करने वाले भाजपा नेताओं और ट्रस्‍ट के सदस्‍यों को दुनिया के करोड़ों हिंदुओं से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए। उन्‍होंने राम मंदिर के नाम पर हो रही जमीन खरीद में भ्रष्‍टाचार से जुड़े कुछ नए मामले भी मीडिया के आगे पेश किए। संजय सिंह ने कहा कि देश और दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं के साथ किस तरह से खिलवाड़ किया गया है, इसका पूरा प्रमाण सामने आ चुका है। भाजपा को अब जाकर अपना चेहरा काला कर लेना चाहिए। प्रभु श्रीराम के मंदिर के नाम पर घोटाला, उनकी जमीन की खरीद के नाम पर घोटाला।

आज अगर मंदिर निर्माण में विलंब का कोई कारण है तो वह है भाजपा के नेताओं की चंदा चोरी, ट्रस्‍ट के लोगों की चंदा चोरी।आठ दिन बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। आज करोड़ों रामभक्‍त भाजपा से जवाब मांग रहे हैं। भाजपा ने संतों, महंतों, शंकराचार्य सहित और करोड़ों रामभक्‍तों की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। राज्‍यसभा सांसद ने रविवार को अयोध्‍या में संतों ने मीटिंग की चर्चा करते हुए बताया कि इसमें संत दिलीप दास भावुक हो गए। कहा कि प्रभु श्रीराम यहां बालक रूप में हैं और हम उन पर ममता लुटाते हैं, जैसे एक मां अपने बच्‍चे की सेवा करती है ठीक उसी प्रकार रामभक्‍त प्रभु श्रीराम पर ममता लुटाते हैं, सेवा करते हैं, स्‍नेह रखते हैं। दूसरी ओर भाजपा रामभक्‍तों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए मंदिर निर्माण में चंदा चोरी करने में जुटी हुई है। 

भाजपा नेताओं की मिलीभगत से कभी बीस लाख की जमीन एक करोड़ में ट्रस्‍ट को बेच दी जाती है तो कभी दो करोड़ की जमीन साढ़े अट्ठारह करोड़ में खरीद ली जाती है। भाजपा के मेयर रिषिकेश उपाध्‍याय के भांजे दीप नारायण जो जमीन बीस लाख में खरीदते हैं वही रामजन्‍मभूमि ट्रस्‍ट ढाई करोड़ में खरीदती है। खुद को रामभक्‍त बताने वाले भाजपा नेता कैसे रामभक्‍त हैं, सबने देख लिया। बुजुर्ग सावित्री देवी ने जो जमीन अपने पौत्र दीपनारायण को दान में दी उसे एक करोड़ रुपये में उसने ट्रस्‍ट को बेच दिया। अनिल कुमार मिश्र हर जमीन की खरीद में गवाह हैं। वह प्रभु श्रीराम का मंदिर नहीं बनवा रहे हैं, तहसील में बैठकर जमीन की दलाली खा रहे हैं। वह कोई सामान्‍य व्‍यक्ति नहीं हैं, उन्हें प्रभु श्रीराम का मंदिर बनवाने के लिए प्रधानमंत्री ने ट्रस्‍ट का सदस्‍य बनाया है, लेकिन वह अपना आलीशान घर बनवाने में जुटे हैं।

संजय सिंह ने कहा कि अयोध्‍या में एकमात्र ऐसा मकान जिसमें लिफ्ट लगी है, वह अनिल मिश्र का है। संजय सिंह ने एक नया मामला पेश करते हुए बताया कि ब्रजमोहन दास ने 23 मई को एक जमीन चंपत राय जी को बेची। इसकी मालियत 92 लाख है, लेकिन यह छह गुना ज्‍यादा दाम पर पांच करोड़ साठ लाख रुपये में ट्रस्‍ट को बेच दी गई। भाजपा नेता दीपनारायण को सर्किल रेट से कम दाम पर जमीन मिल जा रही है मगर ट्रस्‍ट को राममंदिर के लिए चार गुना, पांच गुना, छह गुना और 12 गुना ज्‍यादा कीमत पर भूमि मिल रही है। यह चंदा चोरी नहीं तो और क्‍या है। बीजेपी के नेताओं और ट्रस्‍ट के लोगों को दुनिया के करोड़ों हिंदुओं से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए। चंदा चोरी के आरोपित सारे लोगों से वो सारा पैसा वसूला जाना चाहिए, जो इन लोगों ने जमीन खरीद में धांधली से जुटाया है। जिन ब्रजमोहन दास जी ने 92 लाख की जमीन पांच करोड़ साठ लाख में ट्रस्‍ट को बेची है, कोर्ट ने उसी जमीन के गाटा संख्‍या 80 को उनका नहीं माना है।

मतलब करीब डेढ़ करोड़ की जो जमीन उनकी थी ही नहीं वह भी ट्रस्‍ट की ओर से उनसे खरीद ली गई। जो जमीन मार्च के महीने में निरस्‍त हो गई, वहीं जमीन वह 23 मई को बेच देते हैं। अयोध्‍या में एकमात्र घर है, जिसमें लिफ्ट लगी हुई है। संजय सिंह ने जमीन खरीद में हो रही धांधली के खिलाफ आचार्य देवेंद्र प्रसाद जी का बयान भी मीडिया के आगे पेश किया, जिसमें उन्‍होंने बताया कि किस तरह से उन्‍होंने प्रभु श्रीराम के मंदिर के नाम पर अपनी जमीन बीस लाख में बेची और फिर उसे ढाई करोड़ में बेच दिया गया। संजय सिंह ने मामले में अब तक कोई कार्रवाई न होने पर दुख जताया। कहा कि चंदा चोर अब मुझ पर मंदिर निर्माण में रोड़ा अटकाने का आरोप लगा रहे हैं। दरअसल, वो ही खुद मंदिर निर्माण में असली बाधा हैं।

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