मोदी, योगी की जोड़ी ने किया चमत्कार

 


भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता कल्याण सिंह ने पिछले दिनों मुझसे कहा था कि यह देश का सौभाग्य है कि उसे प्रधानमंत्री के रूप में ऐसा कर्णधार मिला है, जिसने पतन की ओर तेजी से गिर रहे देश को संभालकर उसे मात्र पांच वर्षों में उस बुलंदी पर पहुंचा दिया है, जिसकी पहले कल्पना नहीं की जा सकती थी। मोदी के कारण आज पूरे विश्व में भारत का डंका बज रहा है तथा एक-दूसरे के विरोधी देश भी भारत के मित्र-देश बने हुए हैं। कल्याण सिंह ने मुझसे कहा था कि केन्द्र की भांति उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है कि उसे योगी आदित्यनाथ के रूप में ऐसा कर्णधार मिल गया है, जिसने कांग्रेस, सपा व बसपा के शासनकाल में रौंद डाले गये उत्तर प्रदेश को न केवल नया जीवन प्रदान किया, बल्कि वह प्रदेश को बहुत तेजी से विकास के शिखर की ओर ले जा रहे हैं तथा मोदी और योगी की जोड़ी चमत्कार का पर्याय बन गई है। कल्याण सिंह ने बहुत ठीक कहा कि देश में मोदी ने और उत्तर प्रदेश में योगी ने जो कर दिखाया है, वैसा कुछ वर्ष पूर्व किसी को भी अनुमान नहीं हो सकता था। स्वयं कल्याण सिंह का पहला मुख्यमंत्रित्वकाल प्रदेश का स्वर्णिम काल माना जाता है। लेकिन उस समय कल्याण सिंह को केन्द्र में प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी उपलब्ध नहीं थे, फिर भी उन्होंने उत्तर प्रदेश में स्वर्णिम काल कायम किया था। 
     मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सौभाग्य है कि केन्द्र में उन्हें अपने-जैसे चरित्रवान प्रधानमंत्री का   सान्निध्य प्राप्त हुआ है। दोनों में बड़ी समानता है। दोनों जमीनी नेता हैं तथा आम जनता के बीच जिंदगी बिताकर ऊपर उठे हैं। दोनों का ईमानदारी और योग्यता में जवाब नहीं है। दोनों ही हर पल जनकल्याण एवं देशहित के प्रति पूर्णरूपेण समर्पित हैं। दोनों सादगीपसंद एवं कठोर परिश्रमी हैं तथा त्याग की प्रतिमूर्ति माने जाते हैं। नरेन्द्र मोदी ने जब केन्द्र की सत्ता संभाली थी, उस समय देश पूरी तरह चौपट  स्थिति में था। उससे पहले प्रधानमंत्री की कुरसी पर ऐसा कठपुतला बैठा हुआ था, जिसने कुरसी सलामत रखने के लिए अपने पद की गरिमा ताक पर रख दी थी तथा सत्ता का वास्तविक कर्णधार किसी दूसरे को बन जाने दिया था। जिसने देश को भ्रष्टाचार एवं घोटालों के दलदल में डुबो दिया था। जो कुरसी के लालच में एक मंदबुद्धि के आगे नतमस्तक रहता था। उस समय महंगाई चरम पर थी तथा पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ था। धरती, आकाश व पाताल, तीनों जगह सरकार घोटालों में आकंठ डूबी हुई थी। यदि वर्ष 2014 के चुनाव में वह सरकार पुनः आ गयी होती तो शायद अब तक देश लगभग नष्ट हो चुका होता। लेकिन 'जब-जब होय धरम की हानी' वाली उक्ति को चरितार्थ करते हुए ईश्वर ने न केवल देश को नष्ट होने से बचा लिया, बल्कि नरेन्द्र मोदी के रूप में अद्भुत कर्णधार भेजकर भारत को  पुनः स्वर्णयुग की ओर द्रुत गति से अग्रसर कर दिया। 
    उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही हुआ। कांग्रेस, सपा और बसपा के शासनकाल में उत्तर प्रदेश हर तरह से  चौपट कर दिया गया था तथा उसे लूटलूट कर कंगाल किया जाता रहा। सरकार की तमाम योजनाएं इसलिए बनाई जाती थीं कि उनमें लूटने का भरपूर अवसर मिले। लूट-विशेषज्ञ अफसर लूटने के रास्ते एवं उपाय बताकर सरकारों के चहेते बन गये थे तथा साथ में उन्होंने अपनी भी तिजोरियां खूब भरीं। कोई भविष्य न देखकर जनता ने उस पतनपूर्ण दशा को अपनी नियति मान लिया था और खामोश बैठ गयी थी। उत्तर प्रदेश ने यह आशा त्याग दी थी कि कभी उसका    उद्धार होगा। ऐसे में प्रदेश की सत्ता के कर्धधार के रूप में योगी आदित्यनाथ का अवतरण हुआ। 
 नरेन्द्र मोदी के प्रताप से जब केन्द्र की भांति उत्तर प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी का परचम बुलंद होकर लहराया तो प्रदेश के संभावित कर्णधार के रूप में कई नाम चर्चित होने लगे थे। लेकिन कर्णधार बने योगी आदित्यनाथ, जिनके व्यक्तित्व  एवं कृतित्व ने उन्हें बेजोड़ सिद्ध कर दिया है। मात्र ढाई वर्ष की   अवधि में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को विकास की दिशा में इतनी तेजी से दौड़ा दिया है कि अब असंभव भी संभव प्रतीत होने लगा है तथा प्रदेश में भी कहा जाने लगा है कि यहां योगी हैं तो मुमकिन है। उत्तर प्रदेश विकास के रंग में ऐसा रंगने लगा है कि रंग निरंतर चटक होता जा रहा है। तभी तो मुझसे कल्याण सिंह ने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार मोदी का कोई जोड़ नहीं है, उसी प्रकार योगी का भी कोई जोड़ नहीं है। दोनों ही 'चमत्कार पुरुष' हैं।  
     मुझे याद है, शुरू के दिनों में लखनऊ में कल्याण सिंह के आवास पर एक सज्जन ने ऐसी घटना बताई थी, जिससे सबको बड़ा आश्चर्य हुआ था। उन्होंने बताया था कि जब संभावित मुख्यमंत्री के रूप में कई नाम चारों ओर चर्चित थे, उस समय उनसे एक रिक्शेवाले ने भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनेंगे। तब चर्चित नामों में योगी आदित्यनाथ का दूर-दूर तक कहीं नाम नहीं था। उन सज्जन ने बताया था कि इसीलिए उन्हें उस समय रिक्शेवाले की बात मजाक लगी थी, मगर जब उसकी भविष्यवाणी सच हुई तो उन्होंने रिक्शेवाले को बहुत ढूंढ़ा, किन्तु वह नहीं मिला। योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बने और शास्त्री भवन के पंचम तल पर रात दो-दो बजे तक बिजली जलती दिखाई देने लगी तो जनता उस समय योगी से न केवल प्रभावित हुई, बल्कि मुग्ध हो गई। योगी के जनकल्याणकारी कड़क फैसलों से जनता में यह विश्वास पैदा हुआ कि अब सचमुच उसका उद्धार करने वाला कोई आ गया है। योगी आत्यिनाथ ने सिद्ध कर दिया कि संन्यासी का काम सिर्फ एकांत में बैठकर धूनी रमाना नहीं है, बल्कि देश व समाज को सही दिशा देना एवं       जनकल्याण करना है। 
 योगी-सरकार से पहले जब उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी तो वह मोदी-सरकार से टकराव की नीति पर चल रही थी। केन्द्र की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं को अखिलेश-सरकार ने ईर्श्यावश उत्तर प्रदेश में लागू नहीं किया, जिससे प्रदेश की जनता को बहुत नुकसान हुआ। प्रदेश में योगी-सरकार के आने से वह टकराव दूर हुआ तथा मोदी-सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उत्तर प्रदेश को मिलने लगा। अखिलेश-सरकार अपने कार्यों से उत्तर प्रदेश के पतन का प्रतीक बन गई थी तो योगी-सरकार अपने कार्यों से उत्तर प्रदेश के उत्थान का प्रतीक बन गयी है। 
      आम धारणा है कि योगी आदित्यनाथ जितनी तेजी से दौड़ने को उत्सुक हैं, उतनी तेजी से दौड़ नहीं पा रहे हैं और इसका कारण यह है कि उनकी तेजी में प्रदेश की नौकरशाही उनका समुचित साथ नहीं दे पा रही है। इसका कारण यह भी हो सकता है कि यहां अब तक जो सरकारें रहीं, उन्होंने विकास के रास्ते पर चलने के बजाय प्रदेश को भ्रष्टाचार के दलदल में फंसाया। परिणामस्वरूप नौकरशाही का चरित्र भी धीरे धीरे उसी स्तर का हो गया। केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सहयोगी के रूप में ऐसे रत्न-अफसर मिले , जो नये विचारों एवं भरपूर ऊर्जा से युक्त थे तथा मोदी की तेजी के साथ उन्होंने पूरी तरह कदमताल किया। लेकिन योगी को वैसे क्रांतिकारी अफसर नहीं मिल पाये। बलविंदर कुमार-जैसे कुुछ अतियोग्य आईएएस अफसर थे भी तो वे सेवानिवृत्त हो गये तथा उनका सही उपयोग नहीं हुआ। फिर भी योगी आदित्यनाथ का व्यक्तित्व ऐसा है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनका अब तक का तीस महीने का कार्यकाल उत्तर प्रदेश का भाग्य तेजी से बदलनेवाला सिद्ध हुआ है। प्रदेश का भविष्य अब अतिशय उज्ज्वल है।


श्याम कुमार


वरिष्ठ पत्रकार


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