खनन के खेल में सरकार फेल ?


 



सोनभद्र | खनन जितना गहरा होता है उतनी ही मोटी रकम खनन विभाग के अधिकारी कमाते है | खनन विभाग हमेशा से सरकारी चहेतों के पास रहा है अर्थात सरकार में जिस अधिकारी की पहुँच ऊँची है उसी के हाथ में खनन विभाग रहा है परन्तु योगी सरकार जो जीरो टॉलरेंस की बात करती है ऐसी सरकार में ऐसे खेल चौकाने वाले हैं | इस सरकार में भी खनन में बड़े खेल चल रहे हैं | क्या सरकार इस खनन के खेल में फेल हो चुकी है ? बड़ा प्रश्न है | आखिर योगी सरकार को भी भरमाने में इन अधिकारियों को महारत हासिल हो चूका है |



जनपद सोनभद्र में वर्ष 2005 में कार्यरत खनन पट्टों की संख्या लगभग 152 थीं, शनैःशनैः खनन पट्टों का समय सीमा समाप्त होता गया| फिर वर्ष 2012 में कुल खनन पट्टों की संख्या लगभग 127 ही रह गयी,तब लगभग 275 से 300 क्रशर प्लांट पर पत्थर की उपलब्धता सम्भव नहीं होता था | वर्तमान में जनपद सोनभद्र के खान अधिकारी 18 खनन क्षेत्रों (खदानों) से सभी क्रशर प्लांट को चलाने की बात लिख कर दे रहे हैं। जबकि उसमें माननीय न्यायालय में 5-6 पट्टों का मुकदमा लम्बित है।जिसकी वजह से उनका संचालन बन्द है।




सोनभद्र में वर्तमान में  12 से 14 खदानों में  250 से 275 क्रशर प्लांट चल रहे हैं , जबकि 127 खदानो में भी लगभग इतने ही क्रशर प्लांट चलते थे क्या बग़ैर अवैध खनन या बिना अनियमितता के यह सम्भव है?  खनन व्यापारियों के प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि हमने पूर्व में भी निदेशालय के साथ उच्च अधिकारी की वार्ता के समय भी अवैध खनन व अनियमितता के सम्बंध में साक्ष्यों के साथ हमलोगों ने बताया था, तब उच्च अधिकारियों ने यहीं शब्द कहा था कि मुझे मालूम है कि वहाँ अवैध खनन/बिना ई-प्रपत्र MM11/दूसरे राज्यों के ई-प्रपत्रMM11 से हो रहा है?हम गिट्टी, सस्ता बाजार में उपलब्ध तो करा रहे हैं | आप लोग इसको छोड़िए, सरकार के पास बहुत राजस्व है| आखिर किसका संरक्षण प्राप्त है,जो इतना बेखौफ होकर अवैध खनन व अनियमितता को अधिकारीगण बढ़ावा देते रहे हैं |




मुख्य अवैध खनन व अनियमितता वाले खदानों में आज भी बेखौफ होकर रात दिन पोकलेन मशीन से खनन कार्य हो रहा है,उनकी तो अभी जाँच हुई ही नहीं है,आखिर इनको किसका संरक्षण प्राप्त है"? और जिनकी जाँच हुई उनको अधिकारी नोटिस देकर अपना पिंड छुड़ा रहे है | क्यों ? नोटिस के जरिए अधिकारी खनन माफियों को सीखा रहे हैं कि अवैध खनन करते रहो और जुर्माना भरते रहो |




उच्चस्तरीय जाँच टीम द्वारा जाँच रिपोर्ट में केवल पट्टाधारक को दोषी ठहराया जाता रहा है| जो अधिकारी वर्ग व कर्मचारी वर्ग की फौज यहाँ इसी प्रकार के अवैध खनन/अनियमितता को रोकने के लिए नियुक्त है, किस कार्य में व्यस्त रहते हैं"? मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद ही आनन फानन में जाँच की गई है, आखिर क्यों? इससे पहले कौन से नींद में थे अधिकारी ?




यदि वास्तव में सरकार अवैध खनन की प्रमाणिकता की जाँच करवाना चाहती है तो जो भी 250-275 क्रशर प्लांट अभी संचालन में है, उनके विद्युत बिल की जाँच कराये तभी मालूम हो जायेगा कि कितना विद्युत का उपयोग किया गया है और कितना अवैध खनन किया गया है | 


 


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