सी ० आयी ० पी ० एल ० फाउंडेशन करने जा रहा पहाड़ के बच्चो का बौद्धिक एवं शैक्षिक विकास


उत्तराखंड / देहरादून। कुछ विशेष व्यक्ति जो समाज के कुंठाओ और कुरीतियों को मिटाकर लाना चाहते है सामाजिक समरसता और समानता जो कर  रहे है  शैक्षिक विकास हेतु हर संभव प्रयास , ऐसे बच्चो का शैक्षिक और बौद्धिक विकास जो पहाड़ों के गॉंवों में रह गए है वंचित , बताते चले की नोयडा की एक सामाजिक संस्था सी ० आयी ० पी ० एल ० फाउंडेशन जो विगत सात वर्षों से समाज की सेवा हेतु प्रतिबद्ध है जो कभी बाढ़ पीड़ितों की सेवा कभी निर्मल गंगा अभियान तो कभी अन्य त्रासदी में यहां तक की देश में आये किसी भी मुश्किल में सदैव स्त्म्भ की भांति अडिग रहती है , कोरोना काल में राशन बाँट कर हजारो परिवार का चुल्हा बुझने नहीं दिया और एक कीर्तिमान हासिल किया , आज पहाड़ो के पास बसे गावों से ऐसे बच्चो को चयन किया जो आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं है परन्तु पढ़ने की लालसा रखते है सी ० आयी ० पी ० एल ० फाउंडेशन के मुख्य समाजसेवी विनोद कुमार ने जो निर्णय लिया  शब्दों में बयान नहीं  किया जा सकता बताते चले की देहरादून के आस -पास के पिछड़े गावों से बीस प्रतिभावान बच्चों का चयन किया , आर्थिक स्थिति सुदृढ़ नहीं होने के कारण तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते है और किसी प्रतिस्पर्धा  का  हिस्सा नहीं बन पाते उन बच्चो के लिए संस्था ने टेबलेट कंप्यूटर निःशुल्क  वितरण करने का निर्णय लिया तथा विनोद कुमार की उदारता ने वहां के परिजनों के विषय में सोचने पर भी विनोद कुमार को मजबूर कर दिया जिसके लिए संस्था की तरफ से डेढ़ सौ परिवारों को कोरोना किट जिसमे की जूट बैग , मास्क , साबुन एवं अन्य आवश्यक बस्तुओ को वितरण करने का निर्णय लिया जो की दिनांक चौदह अगस्त को अपराह्न दो बजे ग्राम पंचायत कोटी मयचक सुनिश्चित किया गया है , विनोद कुमार हर वक्त समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास करने वाले एक महान समाजसेवी जो निःस्वार्थ भाव से बौद्धिक  एवं शैक्षिक समाज की स्थापना हेतु स्वंय को गतिशील रखते है प्रेसवार्ता के दौरान विनोद कुमार ने कहा की हमारा जीवन तब तक अधूरा है जब तक देश का एक भी बच्चा भूखा अथवा शिक्षा से वंचित रह जाता है , समाज सेवा अगर निःस्वार्थ भाव से किया जाये तो मानवता का कर्तव्य सही मायने में निभाया जा सकता है विनोद कुमार ने कहा की मानव का धर्म मानवता का परिचय देना है जहां मानव के अंदर आत्मीयता का आभाव नहीं होना चाहिए , देश आखिरी गावों का भी नागरिक न भूखा रहे न शिक्षा से वंचित रह जाये जिसके लिए सी ० आयी ० पी ० एल ० फाउंडेशन सदैव प्रतिबद्ध है !


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