ईमानदारी , सादगी , साफगोई के पर्याय थे बाबू रघुवंश प्रसाद सिंह - नैमिष प्रताप सिंह


आज लोक नायक जय प्रकाश नारायण की पाठशाला से निकले बाबू रघुवंश प्रसाद सिंह इस भौतिक संसार से विदा हो गये। मेरे जैसे लोग जिन्होंने शास्त्री जी को नहीं देखा , वे बाबू रघुवंश प्रसाद सिंह के कार्य - व्यवहार से श्रद्धेय लाल बहादुर शास्त्री जी के व्यक्तित्व की कल्पना करते थे। ईमानदारी - सादगी - साफगोई  के पर्याय बाबू रघुवंश प्रसाद सिंह को ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के लिए सदैव याद किया जायेगा। यह वक्तव्य लोकशक्ति अभियान ' एक स्वैच्छिक संगठन ' के अध्यक्ष व 36 रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से पूर्व स्वतंत्र प्रत्याशी नैमिष प्रताप सिंह ने हमारे संवाददाता से बातचीत में व्यक्त किया।  


नैमिष प्रताप सिंह ने बताया कि श्रद्धेय रघुवंश प्रसाद सिंह राजनीति में आने से पूर्व सीतामढ़ी के एक कालेज में गणित विषय के प्रोफेसर हुआ करते थे। जे.पी. के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रभावित होकर रघुवंश बाबू कर्पुरी ठाकुर के सानिध्य  में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के झंडे तले सक्रिय हुए। आपात काल में वे मीसा के तहत गिरफतार हुए। बिहार सरकार में वे 1977 - 79 तक ऊर्जा मंत्री रहे।  


नैमिष प्रताप सिंह ने रघुवंश बाबू के व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा करते हुए कहा कि वे आपात काल में ही बिहार के दिग्गज नेता लालू प्रसाद यादव के निकट आये और तीन दशक से ज्यादा समय तक उनके राजनीतिक सहयोगी रहे। डा. मनमोहन सिंह की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में ग्रामीण विकास के मंत्री के रूप में मनरेगा सहित दूसरी योजनाओं को लागू करने की वजह से उनको सदैव याद किया जायेगा क्योंकि इससे गरीबी उन्मूलन और समाजिक कल्याण को बढ़ावा मिला। 


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