जनपद लखनऊ के अन्तर्गत धारा -144 दण्ड प्रक्रिया संहिता लागू


लखनऊ। संयुक्त पुलिस आयुक्त, अपराध एवं मुख्यालय लखनऊ एन0 चैधरी ने बताया कि द0प्र0सं0 की धारा 144 के अन्तर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जन-जीवन एवं निजी सम्पत्ति की हानि, दंगा, बलवा के निवारण के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश पारित किये हैं।


संयुक्त पुलिस आयुक्त, कमीशन रेट लखनऊ एन0 चैधरी ने बताया कि दिनांक 17.09.2020 को विश्वकर्मा जयन्ती व दिनांक 08.10.2020 को चेहल्लूम त्यौहार के अवसर पर भी सामाजिक तत्वों द्वारा व्यवस्था भंग की जा सकती है जिससे कटुता बढ़ने व लोक प्रशांत विक्षुप्त होने की प्रबल आंशका है। वर्तमान में जारी गाइडलाइन का अनुपालन कराये जाने हेतु शान्ति सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था बनाये रखना परम आवश्यक है।


आगामी दिनों में प्रस्तावित ग्रह मंत्रालय भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 के संक्रमण के दृष्टिगत जारी की गई नई गाइड लाइन को ध्यान में रखकर यह आवश्यकता समझता हूं कि धारा 144 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए कानून व्यवस्था को बनाए रखने शांति व्यवस्था को कायम रखने सार्वजनिक एवं निजी व लोक संपत्ति के सुरक्षार्थ तथा जन सामान्य में कोविड-19 के संक्रमण के प्रसारण को रोकने हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश पारित किया है।


उन्होंने बताया कि कमीशन रेट में ऐसे सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रम, जुलूस, रैली, प्रदर्शन, व्यापारी प्रदर्शनी इत्यादि सशर्त प्रतिबंधित रहेंगे किसी भी ऐसे कार्यक्रम में 05 से अधिक व्यक्तियों का सम्मेलन संभव नहीं होगा। आगामी त्योहारों पर परंपरागत जुलूस या कार्यक्रम बिना पुलिस के अनुमति के आयोजित नहीं किए जाएंगे न ही किसी प्रकार की नई परंपरा स्थापित होगी किसी भी राजनीतिक दल द्वारा सार्वजनिक स्थलों अथवा महत्वपूर्ण स्थानों पर धरना प्रदर्शन सामूहिक प्रदर्शन नहीं किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि किसी धार्मिक स्थल/सार्वजनिक स्थल/जुलूसों/अन्य आयोजनों पर लाउड-स्पीकर की ध्वनि की तीव्रता के सम्बन्ध में ध्वनि-प्रदूषण (विनिमय और नियंत्रण), नियम-2000 यथा संशोधित के प्राविधानों का अनुपालन आवश्यक होगा रात्रि 22ः00 बजे से प्रातः 06ः00 बजे तक कोई भी ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग नही किया जायेगा तथा मा0 सर्वोच्च न्यायालय के ध्वनि के सम्बन्ध में दिये गये दिशा निर्देशों का अनुपालन करना आवश्यक होगा। अपरिहार्य स्थिति में अनुमति पुलिस आयुक्त/संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) से लेनी होगी। इस संबंध में आकस्मिक परिस्थितियों में बिना सक्षम अधिकारी के पूर्वानुमति प्राप्त किए आवागमन न किया जाए कोविड-19 दृष्टिगत जनपद में चिन्हित हॉट-स्पॉट में क्षेत्रों में कोई भी धार्मिक/ सांस्कृतिक/राजनैतिक अथवा सार्वजनिक कोई भी आयोजन नहीं किया जाएगा और न ही ऐसा कोई आयोजन इस क्षेत्र से गुजरेगा ऐसा करने पर वह महामारी अधिनियम डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, लागू टाउन व धारा 144 सीआरपीसी के उल्लघंन का दोषी माना जाएगा।


उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति एक-दूसरे के धर्म ग्रन्थों का अपमान नही करेगा। धार्मिक स्थानों,दीवारों आदि पर किसी प्रकार के धार्मिक झंडे, बैनर, पोस्टर आदि नहीं लगायेगा, न ही किसी को इस कार्य में सहयोग प्रदान करेगा, लखनऊ कमिश्ररेट सीमा के अन्दर किसी भी समुदाय के व्यक्ति द्वारा दूसरे समुदाय के भावनाओं के विपरीत ऐसा कोई कार्यक्रम आयोजित नही किया जायेगा, जिससे शांति भंग होने की आशंका हो और न ही दूसरे समुदाय के धार्मिक भावनाओं के विरूद्ध किसी प्रकार का उत्तेजनात्मक भाष्सण दिया जायेगा और न ही ऐसे किसी कार्यक्रम की घोषणा की जायेगी, लखनऊ कमिश्ररेट क्षेत्र की सीमा के अन्दर कोई भी व्यक्ति ऐसा कोई अनुचित मुद्रण/प्रकाशन जिससे साम्प्रदायिक तनाव अथवा समुदायों के बीच वैमनस्य उत्पन्न हो, नही करेगा, विवाह एवं दाह संस्कार के दौरान शासन द्वारा निर्धारित संख्या में नियमानुसार अनुमति प्राप्त कर लोग एकत्रित हो सकेगें तथा इस दौरान सोशल/फिजिकल नाम्र्स का पालन करेगा। कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थलों/कन्टेनमेंट जोन (हाॅट-स्पाॅट्स) पर लगे ड्रोन कैमरा, बैरियर, सी0सी0टी0वी0 कैमरा, पी0ए0 सिस्टम के साथ छेड़छाड़ नही करेगा।


उन्होंने बताया कि उक्त आदेश को तत्काल पारित किए जाने की आवश्यकता है तथा समय अभाव के कारण यह देश एक पक्षीय रूप से पारित किया जा रहा है फिर भी यदि कोई भी व्यक्ति संस्था या पक्ष इस आदेश में कोई छूट या शिथिलता चाहे तो उसे पुलिस आयुक्त, कमीशन रेट लखनऊ या संयुक्त पुलिस आयुक्त पुलिस उपायुक्तों, लखनऊ के सम्मुख विधिवत आवेदन करने का अधिकार होगा, जिस पर सम्यक सुनवाई एवं विचारों प्रांत समुचित आदेश पारित किए जाएंगे, यह आदेश तत्काल प्रभावी होगा और यदि बीच में वापस न लिया गया तो 15 अक्टूबर 2020 तक लागू रहेगा इस आदेश अथवा इस आदेश के किसी अंश का उल्लंघन करना भारतीय दंड विधान की धारा 188 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।


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