महिलाएं ही संभाल सकती हैं दोहरी जिम्मेदारी - माधुरी सिंह


लखनऊ। एक महिला के कई रूप होते हैं,एक महिला बेटी भी है,बहन भी है,पत्नी भी है और माँ भी। इस धरती पर माँ का कोई ऑप्शन नहीं है। एक समय था जब कहा जाता था कि कामकाजी अर्थात नौकरी करने वाली लड़की से शादी करने से परिवार बिखर जाता है। कुछ तो ऐसे भी परिवार थे जो शादी के बाद महिलाओं को नौकरी नहीं करने देते थे और अगर वो नौकरी कर भी रही होती थी तो भी घर बैठा लिया जाता था। ऐसे ही ज़माने की शिक्षिका है माधुरी सिंह।


माधुरी सिंह केंद्रीय विद्यालय अलीगंज की प्रथम पाली की प्राईमरी कक्षा की शिक्षिका हैं इनसे हमारे संवाददाता ने बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि महिलाएं अपनी जिम्मेदरियों को कैसे सरलता पूर्वक निभाती हैं खासकर काम काजी महिलाएं।इस सवाल के जवाब में माधुरी सिंह ने कहा कि महिलाओं को ईश्वर से असीम शक्तियां प्राप्त है जिस काम या जिम्मेदारी को सोचने से भी डर लगने लगता है उन जिम्मेदरियों को महिलाएं बड़े आसानी से संभाल लेती हैं। मेरी भी जब शादी हुई तो मेरे लिए भी यह जिम्मेद्दारी बड़ा ही कठिन जान पड़ती थी,खुद और पति को भी काम पर समय से भेजना,घर के बुजुर्गो का भी ख्याल रखना,उसके बाद बच्चे को संभालना बड़ा मुश्किल था कभी कभी ऐसा लगता था कि कहीं नौकरी ना छोड़नी पड़े लेकिन पति व परिवार का साथ मिलता रहा और जब विद्यालय आती थी तो बच्चों के साथ इतना घुलमिल जाती थी की कभी जिम्मेदरियों के बोझ का पता ही नहीं चला।


कोरोना काल में बच्चों की पढाई व विद्यालय खोलने की बात पर शिक्षिका माधुरी सिंह ने कहा कि यह तय करना तो सरकार का काम है। वैसे तो बच्चों के अभिभावक भी नहीं चाहते की विद्यालय खुलें फिर भी सरकारी निर्देशों के अनुसार काम किया जायेगा। और जहाँ तक पढाई की बात है हमलोगों को इस समय काफी मेहनत करना होता है साथ में बच्चे को भी ऑनलाइन पढाई में काफी दिक्कतें आती है खासकर नेटवर्क की सबसे ज्यादा समस्याएं रहती हैं फिर कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा एक अच्छा विकल्प है। 


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