विपक्षी दल देश के किसानों को गुमराह करने का कर रहे है प्रयास - स्वतंत्र देव सिंह


लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए कृृषि सुधार विधेयकों को किसानों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कृषि सुधार विधेयकों को लेकर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों द्वारा किये जा रहे विरोध को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही देश के किसानों को कानून के नाम पर जकडे़ रखा। कांग्रेस ने आज तक तो किसानों के हित में कोई फैसला लिया नहीं और आज जब कृषि सुधार पर फैसले लिए जा रहे है तो किसानों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सरकार चाहती है कि किसान अपनी भूमि को पूंजीपतियों को बेच दे जबकि तथ्य यह है कि किसानों को इन विधेयकों में पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की गई है, किसानों की भूमि की बिक्री या गिरवी रखना पूर्णतः निषिद्ध है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने किसानों को सशक्त करने के लिए आज तक कुछ भी नहीं किया। 55 साल में एक बार कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने की योजना बनाई और उसमे भी बड़ा घोटाला किया। कांग्रेस के पास कृषि व्यवस्था में कोई भी सुधार करने की न तो नीयत थी न ही कोई इच्छाशक्ति।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि यह विधेयक 70 वर्षो से हमारे अन्नदाताओं के होने वाले शोषण को समाप्त कर एक नई व सुगम व्यवस्था को स्थापित करेंगे। पूर्व में किसानों को अपनी फसलों का भुगतान लेने में अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। वहीं हाल ही में पारित हुए विधेयक के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक व्यापारी को उसी दिन या अधिकतम तीन कार्य दिवसों के भीतर ही किसान की फसल का भुगतान करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक एक ऐसा विवाद निवारण तंत्र उपलब्ध कराएंगे जहा किसी भी विवाद व समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में किसान तुरंत अपने स्थानीय एस.डी.एम के पास जा कर अपनी समस्याओं का निवारण करा सकेगा। बकाया राशि होने की स्थिति में किसानों की जमीन पर किसी भी तरह की कार्यवाही करने का अधिकार यह विधेयक नहीं देता है।


श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस व दूसरे विरोधी दल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के विषय में भड़काने का प्रयास कर रहे है, जबकि स्वयं प्रधानमंत्री कई बार कह चुके है कि देश भर में एमएसपी की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। किसानो के लिए फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य के सुरक्षा कवच को बरकरार रखा गया है। सरकारी खरीद भी जारी रहेगी और इसी कड़ी में मोदी सरकार द्वारा गत 21 सितम्बर को न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी भी की गई है। गेहूं में 50 रुपये प्रति क़्वींटल, चना में 225 रुपये प्रति क़्वींटल, जौं में 75 रुपये प्रति क़्वींटल, मसूर में 300 रुपये प्रति क़्वींटल, सरसों में 225 रुपये प्रति क़्वींटल और कुसुम्भ में 112 रुपये प्रति क़्वींटल की ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि किसान खाद्य कंपनियों के साथ उत्पादन की बिक्री के लिए प्रत्यक्ष रूप से समझौता कर सकेंगे। किसी भी कारण से यदि किसान की फसल के मूल्य का भुगतान नहीं हो पाया तो कड़े जुर्माने का भी प्रावधान इस विधेयक में रखा गया है। श्री सिंह ने कहा कि देश में अब हमारे किसानों के लिए आधुनिक डिजिटल व्यापार का माध्यम तैयार होगा जिससे हमारे मेहनतकश किसानों को मदद मिलेगी। वैश्विक बाजारों में कृषि उपज की आपूर्ति हेतु निजी क्षेत्र का निवेश आकर्षित करने के लिए यह कदम उत्प्रेरक का काम करेगा। इससे न केवल उपज बढ़ेगी, बल्कि बेहतर परिणाम भी सामने आएंगे जिससे व्यापार के लेन देन में और भी अधिक पारदर्शिता आएगी।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि इस विधेयक से मंडियों में उत्पादों की बिक्री करते समय प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से लगने वाले सभी तरीके के अतिरिक्त शुल्क कम होंगे। उन्होंने कहा किसानों के लिए ”एक राष्ट्र एक बाजार” की अवधारणा को स्थापित करते हुए किसानों को उनकी उपज का उचित दाम बिना बिचैलियों के दिलाने का कार्य मोदी सरकार ने किया है। राज्यों का एकाअधिकार समाप्त करते हुए किसान स्वयं अपनी फसल किसी को भी बेच सकते है। उदाहरण के तौर पर अब हरियाणा का किसान अपनी फसल उत्तर प्रदेश में आकर उचित दाम पर बेच सकेगा।


श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार किसानों की सेवा अथवा सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है किसानों की आय को दोगुना करने के लिए निरंतर हरसंभव प्रयास जारी है। हमारा कृषि क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह 60 प्रतिशत से अधिक आबादी को रोजगार प्रदान करता है व जी.डी.पी. में 17 प्रतिशत का योगदान देता है, इतने प्रभावशाली विधेयक संसद में पारित हुए और ऐसे महत्वपूर्ण मौके पर विपक्ष के नेता सदन से गायब रहे ऐसे नेता कभी भी देश की भलाई के बारे में नहीं सोच सकते है।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कांग्रेस द्वारा किये जा रहे विरोध पर पलटवार करते हुए कि आश्चर्य की बात तो यह है कि 2013 में खुद राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के शासन वाले 12 राज्य फल और सब्जियों को एपीएमसी एक्ट से बाहर करेंगे। अब कांग्रेस पार्टी ही इस एक्ट में बदलाव का विरोध कर रही है। यहां तक कि यदि हम कांग्रेस का वर्ष 2019 का घोषणा पत्र पढेंगे तो उसमे उन्होंने स्पष्ट रूप से 11वें बिंदु में एपीएमसी को हटाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम से किसानों को एपीएमसी की जकड़ से आजाद करेगा। यह विधेयक किसानों को अपना उत्पाद सीधे किसी को भी बेचने की छूट देगा। जिससे खरीदारों में प्रतियोगिता बढ़ेगी, और किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार के इस निर्णायक फैसले लेने की मजबूत इच्छाशक्ति के कारण हमारे किसान भाई-बहनों को आज सही मायने में न्याय मिला है।


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