लखनऊ गुरुद्वारा नाका हिण्डोला में आज मनाया गया कार्तिक माह संक्रान्ति पर्व


लखनऊ। ऐतिहासिक गुरूद्वारा नाका हिण्डोला, लखनऊ में सुखमनी साहिब जी के पाठ के उपरान्त हजूरी रागी जत्था भाई हरप्रीत सिंह जी ने अपनी मधुर वाणी में कतिकि करम कमावणे दोसु न काहू जोग।। परमेसर ते भुलियाँ विआपनि सभे रोग।।  शबद कीर्तन गायन कर साध संगत को निहाल किया उसके उपरान्त मुख्य ग्रन्थी ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने कार्तिक माह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस माह में प्रभु मिलाप के लिए मन में चाव एवं भाव उठते हैं।


गुरु जी फरमाते हैं कि जो मनुष्य कर्म करते हैं, उसके फल प्राप्ति के लिये किसी और को दोष देना ठीक नही है क्योंकि परमेश्वर को भुला देने पर मनुष्य हर प्रकार के रोग कष्टों से घिर जाता है। इसलिये हे जीव! तुम हर रोज किसी के पास जाकर क्यों रोते-कुरलाते हो जो अच्छे- बुरे कर्मो  का फल लिखा गया है वह भोगना ही पड़ता है, उसमे अपने करने से कुछ नही हो सकता ‘‘गुरु जी प्रार्थना करते हैं कि हे मेरे बन्दी छोड़ दाता मुझे कष्टों और रोगों से दूर रखो‘‘। अगर भाग्य से किसी मनुष्य को किसी साध पुरुष (गुरु) का संग प्राप्त हो जाये तो उसके सारे फिक्र, चिंता और दुःखों का नाश हो जाता है। कथावाचक ज्ञानी हरविन्दर सिंह जी सुहाना वालों ने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी महाराज जीे चरणों में करोना महामारी से छुटकारे के लिए सरबत के भले की अरदास की। दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष स0 राजेन्द्र सिंह बग्गा ने नगरवासियों को कार्तिक माह संक्रान्ति पर्व की बधाई दी। उसके उपरान्त श्रद्धालुओं में बड़ाह प्रसाद वितरित किया गया।


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