शत प्रतिशत नहरों की सफाई सुनिश्चित करायी जाये - डा0 महेन्द्र सिंह


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डा0 महेन्द्र सिंह ने विभागीय अधिकारियों को सभी जलाशयों, बांधों-बन्धियों की एक माह के अन्दर विधिवत सर्वे कर स्थलीय रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि सिंचाई प्रणालियों से अतिक्रमण हटाने के साथ ही सीपेज एवं लीकेज को पूरी तरह समाप्त किया जाये तथा रंगाई पुताई आदि भी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचलों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही और कोताही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी। उन्होंने अपर मुख्य सचिव सिंचाई एवं प्रमुख सचिव नमामि गंगे व ग्रामीण जलापूर्ति को निर्देश दिये कि फील्ड में तैनात अधीनस्थों के कार्यों की लगातार अनुश्रवण सुनिश्चित करें।


जलशक्ति मंत्री विधान भवन के कक्ष संख्या-80 में नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति तथा सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में प्रत्येक व्यक्ति को शुद्ध पेयजल आपूर्ति किये जाने की प्राथमिकता दी जा रही है। इसलिए जल जीवन मिशन के अन्तर्गत बुन्देल खण्ड के सभी जनपदों तथा विध्य क्षेत्र के जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर को जल उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन सम्भव नहीं है। इसलिए विभागीय अधिकारी आपसी समन्वय कर इन क्षेत्रों के ग्रामीण अंचलों में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर सम्भव प्रयास करें।


डा महेन्द्र सिंह ने कहा कि विभिन्न जलाशयों एवं बन्धों से सीपेज व लीकेज के कारण बड़ी मात्रा में पानी की बर्बादी होती है, इसको बन्द करना सम्बन्धित अभियन्ता की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति किये जा रहे बिन्दु पर निगरानी रखी जाये और छोटी-छोटी कमियों को दूर कर बड़ी मात्रा में पानी को बचाया जाय। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की  लापरवाही के कारण जलाशयों, बन्धियों एवं बन्धों में बड़ी मात्रा में सिल्ट जमा होने से इनकी क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि जलाशयों बन्धों बन्घियों नहरों की सफाई अनिवार्य रूप से करायी जाये, इसके साथ ही मौके पर जाकर टूट-फूट की मरम्मत करायी जाये। उन्होंने जनपद महोबा के बन्धों पर किये गये अवैध कब्जों एवं अतिक्रमण को तत्काल हटाने केे लिए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिेये।


जलशक्ति मंत्री ने निर्देश दिये कि सर्वे करने वाले अधिकारी मौके पर जाकर फोटो के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, इसकेे साथ ही जियो-टैगिंग भी अनिवार्य रूप से करायी जाये। उन्होंने मानसून से पहले शत-प्रतिशत डिसिल्टिंग तथा अतिक्रमण हटाने व बन्धें बन्धियों की मरम्मत किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी 15 अक्टूबर से 15 नवम्बर तक नहरों की सफाई का कार्य कराया जायेगा। इस अवधि में नहरों की पटरी की मरम्मत, गढढामुक्त अभियान, रंगाई-पुताई, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत आदि कार्य भी कराये जायें। उन्होंने कहा कि नहरों की सफाई का कार्य शुभारम्भ एमपी, एमएलए तथा ग्राम-प्रधान व मीडिया के लोगो को आंमत्रित कर कराया जाये। इसके साथ ही पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाये। उन्होंने कहा कि गत वर्ष के सफाई कार्य की लगभग 250 जनप्रतिनिधियों ने पत्र लिखकर सराहना की थी।


अपर मुख्य सचिव, सिंचाई एवं जलसंसाधन, टी0 वेंकटेश ने विभिन्न सिंचाई प्रणालियों से उपलब्ध कराये जा रहे कच्चे पानी के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा प्रस्तावित परियोजनाओं एवं निर्माणाधीन योजनाओं के बारे में जलशक्ति मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठक में दिये गये निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जायेगा और सिंचाई प्रणालियों से पर्याप्त जल ग्रामीण अंचलों को उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने अभियन्ताओं को निर्देश दिये कि अपने क्षेत्र में नियमित भ्रमण करने के साथ ही योजनाओं का अनुश्रवण सुनिश्चिित किया जाये।


प्रमुख सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति अनुराग श्रीवास्तव ने विंध्य/बुन्देलखण्ड क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही विभिन्न पाइप पेयजल परियोजनाओं हेतु सिंचाई विभाग से निःशुल्क कच्चा जल उपलब्ध कराये जाने, जनपद मथुरा में गोकुल बैराज पर मथुरा सीवरेज परियोजना मे पाइपलाइन डालने हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र तथा चित्रकूट जनपद में भरतौल ग्राम समूह पाइप पेयजल योजना के स्रोत बदले जाने के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी। बैठक में सचिव, सिंचाई एवं जलसंसाधन अनिल गर्ग, विशेष सचिव मुश्ताक अहमद, मिशन निदेशक सुरेन्द्र राम तथा विभागाध्यक्ष एवं प्रमुख अभियन्ता, सिंचाई एवं जलसंसाधन, आर0 के सिंह व बुन्देलखण्ड तथा विंध्य क्षेत्र के मुख्य अभियन्ता अधीक्षण अभियन्ता एवं अधिशाषी अभियन्ता मौजूद थे।


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