प्रभु की वाणी को कोई बांध नहीं सकता

प्रभु की वाणी को कोई बांध नहीं सकता। एक-एक गोपी को ठाकुर जी ने अपने प्रेम से बांध लिया। वे सब कृष्ण से प्रार्थना करती है कि हमें छोड़ दो। ठाकुर जी कहते हैं कि मुझे तो मेरी माँ ने बाँधना ही सिखाया है छोड़ना तो सिखाया ही नहीं है।

कन्हैया जिसे एक बार भी बांध लेते हैं फिर उसे कभी नहीं छोड़ते। ईश्वर जिसे अपने बंधन में बाँध लेते हैं, अपनाते हैं। वह यदि माया के प्रवाह में बहने भी लग जाय तो भी उसे भगवान बचा लेते हैं।

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