मनुष्य कहीं भी जाये पंच विषय तो साथ आयेंगे ही



मानव जीवन का लक्ष्य है प्रभु की प्राप्ति। अपने जीवन का भी लक्ष्य निश्चित करना बहुत आवश्यक है। क्योंकि लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही जीवन व्यवहार किया जाना चाहिए। 

प्रहलाद जी ने घर में प्रतिकूल परिस्थिति होने पर भक्ति की। जबकि घर को भक्ति में बाधा रूप मानकर गृह त्याग कर भरत जी वनवास में भक्ति की। मनुष्य कहीं भी जाये पंच विषय तो साथ आयेंगे ही।  

घर में रहकर ही भक्ति करनी है तो प्रह्लाद जी का आदर्श दृष्टि के समक्ष रखो और वनवासी होकर भक्ति करनी है तो भरत जी का जीवन लक्ष्य में रखो।

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