कारपोरेट दुनिया भाजपा की सरंक्षक है और भाजपा उनकी पोषक पार्टी- अखिलेश यादव

 
लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर आज चौथे दिन भी समाजवादी किसान घेरा कार्यक्रम प्रदेश के सभी जनपदों में जारी रहा। जनजागरण और जनसम्पर्क का यह कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हो रहा है। गांवों में अलाव पर चौपाल लगाकर किसानों के बीच उनकी समस्याओं और भाजपा राज में उनके साथ होने वाले अन्याय पर खुलकर चर्चा की है। किसानों को समाजवादी सरकार में उनके हित में किए गए कामों की भी जानकारी दी गई। समाजवादी किसान घेरा कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्रियों और पार्टी पदाधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अब तक एक हजार से ज्यादा गांवों में यह किसान घेरा कार्यक्रम सम्पन्न हो चुका है।
 
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के प्रत्येक गांव में पुलिस भेजी जा रही है। बहाना धान खरीद की रिपोर्ट बनाना है जबकि धान की लूट हो चुकी है। सच्चाई यह है कि इसका उद्देश्य गांवों में डर पैदा करना है ताकि किसानों को आंदोलन से डराकर अलग रखा जा सके। किसानों से बात करने के नाम पर उन्हें धमकाया जा रहा है और किसान नेताओं के साथ समाजवादी पार्टी के नेताओं को भी घरों में नज़रबंद किया जा रहा है।

ऐसा लगता है कि भाजपा का राजनीतिक नेतृत्व अक्षम हो गया है। कृषि कानून पर अब पुलिस बात करेगी? धान खरीद की कथित रिपोर्ट पुलिस इकट्ठा करेगी? अपनी पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा नेतृत्व किसानों से संवाद नहीं कर पा रहा है। भाजपा का चूंकि किसान-खेती से कभी रिश्ता रहा नहीं इसलिए अन्नदाता का सम्मान करना उन्हेें नहीं आता है। कारपोरेट दुनिया भाजपा की सरंक्षक है और भाजपा उनकी पोषक पार्टी है। भाजपा लाख झूठ बोले किसान समझ गया है कि उसके फायदे के नाम पर बनाए गए कृषि कानून वस्तुतः छलावा है। किसानों से जो भाजपा सरकार अपने किए गए एक भी वादे को पूरा नहीं कर सकी है वह किसानों की जिंदगी में खुशहाली कहां से लाएगी। उसकी नीयत तो किसान की खेती छीनकर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और पूंजी घरानों को सौंप देने की है।

जैसे-जैसे भाजपा की जमीन खिसक रही है, वह और भी दमनकारी होती जा रही है। किसान जाग चुका है, वह भाजपा की साजिशों में अब फंसने वाला नहीं है। वह उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदलाव चाहता है। समाजवादी किसान यात्रा और समाजवादी किसान घेरा कार्यक्रमों में किसानों की कई लाख की उपस्थिति जताती है कि सन् 2022 में विकास की साइकिल का दौड़ना तय है।

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