माता के त्रयोदश संस्कार में जाने के लिए पुत्र को पेरोल देने का मामला राज्यपाल के यहां पहुँचा

 


लखनऊ / अमेठी : मनुष्य का जीवन अजीब विडम्बनाओं की कहानी है. हमारे देश में ' विधि के समक्ष समता ' की बात कही गई है लेकिन यह याथार्थ में कितना अर्थहीन है इसका उदाहरण लगातार देखने को मिलता रहता है. एैसे ही एक मामला अमेठी जिले के मुंशीगंज थाने के बन्दोइयां गाँव का है जहाँ मु.अ.सं. 316 / 2020 में राजेश मिश्रा को अभियुक्त बनाया गया , वे 31 / 10 / 2020 से  सुलतानपुर जिला कारागार में निरुद्ध है और अभी तक उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल नहीं हुआ है. इसी बीच राजेश मिश्रा की माता इसराजी देवी का 19 / 12 / 2020 को स्वर्गवास हो गया. राजेश मिश्रा के पुत्र अमित मिश्रा के  द्वारा अपने पिता की पेरोल रिहाई के लिए जो आग्रह किया उस पर विशेष न्यायाधीश , एस.सी./ एस.टी.(पी.ए.)एक्ट ,सुलतानपुर ने 21 / 12 / 2020 को अपने आदेश में यह कहा है कि अंशकालिक जमानत पर रिहा किये जाने की शक्ति राज्य सरकार में निहित है. इस तरह से पेरोल ना मिलने के चलते राजेश मिश्रा अपनी माता का दाह संस्कार नहीं कर पाये. 

इसके बाद मा. न्यायालय के आदेश का संदर्भ देकर अमित मिश्रा ने पुन: जिलाधिकारी अमेठी / अपर मुख्य सचिव ( गृह ) को प्रार्थनापत्र भेजकर अपने पिता राजेश मिश्रा की पेरोल पर रिहाई के लिए प्रार्थनापत्र भेजा जिससे वे अपनी माता का त्रयोदश संस्कार संपन्न कर सकें लेकिन इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई . 29 दिसम्बर को राजेश मिश्रा के परिजनों के आग्रह पर पत्रकार एवं लोक शक्ति अभियान ' एक स्वैच्छिक संगठन ' के अध्यक्ष नैमिष प्रताप सिंह ने आयुक्त अयोध्या मंडल को ईमेल भेजकर पेरोल देने के मामले में शीघ्र निर्णय देने का आग्रह किया. इसके बाद उन्होंने आयुक्त अयोध्या मंडल को फोन किया जो उठा नहीं , उनके आवास पर जिसने भी फोन उठाया उसे पूरा प्रकरण बता दिया गया. इसके बाद नैमिष प्रताप सिंह ने मुख्य सचिव , प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री से लेकर  मुख्यमंत्री के कार्यालय में ईमेल करके वा फोन करके राजेश मिश्रा की पेरोल पर रिहाई के लिए आग्रह किया . अब यह सवाल स्वाभाविक है कि  जब मा. न्यायालय ने लिखित रुप से यह कहा है कि इसमें पेरोल देने का अधिकार राज्य सरकार को है तब मुख्यमंत्री /  मुख्य सचिव /  प्रमुख सचिव : मुख्यमंत्री का कार्यालय विधि सम्मत निर्णय लेने में अक्षम क्यों साबित हो रहा है ? मुख्यमंत्री / प्रमुख सचिव : मुख्यमंत्री / मुख्य सचिव के कार्यालय के गैर जिम्मेदराना कार्य - व्यवहार से परेशान होकर नैमिष प्रताप सिंह ने 29 दिसम्बर को ही राजेश मिश्रा की पेरोल पर रिहाई को लेकर माननीया राज्यपाल जी मिलने के लिए समय देने का आग्रह किया परन्तु उनके कार्यालय से सूचना प्राप्त हुई कि वे मध्य प्रदेश गई हुई है. इसके बाद नैमिष प्रताप सिंह ने माननीया राज्यपाल जी के निजी सचिव से बात करके राजेश मिश्रा की पेरोल पर रिहाई को लेकर प्रार्थनापत्र उनके कार्यालय में प्रस्तुत कर दिया .

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