भक्त को धैर्य रखना होगा, ईमानदारी से अपने कर्म करते रहना होगा



महाराजजी से किसी भक्त का प्रश्न और उस पर उनका उत्तर:

प्रश्न: यह परमार्थ (भगवान की प्राप्ति) का विषय साधन साध्य है या कृपा साध्य?

उत्तर: विश्वास हो तो कृपा साध्य, न हो तो साधन से।

 जिसका अपने गुरु पर अटल विश्वास है, उसका कोई काम रूक नहीं सकता, उसका सब काम आपै हो जाता है।

भगवान की प्राप्ति, भगवान के समीप जा पाना, भगवान की अनुभूति - ये सब हमारे महाराज जी जैसे सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के बिना संभव ही नहीं है- ये निश्चित है।

और

जिसको गुरु पर विश्वास है,

जिसके भाव अपने गुरु के लिए सच्चे हैं,

जो ये मान के चलता है (आवश्यकता पड़ने पर अनेकों बार अपने को याद दिलाता रहता है) कि जो भी उसके जीवन में हो रहा है, सुख हो या दुःख - ये सब गुरु की मर्ज़ी से हो रहा है,

जिसका अपने गुरु के लिए पूर्ण समर्पण है,

ऐसे भक्त को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि महाराज जी कहते हैं की उस भक्त के वास्तविक हित (जो के कभी -कभी भक्त की अपेक्षाओं से भिन्न भी हो सकता है) की चिंता और उसके हित का सही समय पर निष्पादन अपने -आप हो जाता है। अर्थात ऐसे भक्त के कल्याण का उत्तरदायित्व स्वयं गुरु संभाल लेते हैं।

और ऐसा होने के लिए भक्त को धैर्य रखना होगा, ईमानदारी से अपने कर्म करते रहना होगा और गुरु में अपने विश्वास को दृढ़ बनाये रखना होगा।

महाराज जी सबका भला करें।

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