भाजपा सरकार में असहमति बड़ा अपराध है - अखिलेश यादव



लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार में असहमति बड़ा अपराध बन गई है। विपक्ष उसको फूटी आंखो नहीं सुहाता है। लोकतंत्र की मान्यताओं में उसका विश्वास नहीं हैं। देश का अन्नदाता अपनी मांगों को लेकर 20 दिनों से आंदोलित है। भाजपा सरकार उनकी सुनने के बजाय अपनी मनवाने का हठ पाले हुए है। यही नहीं अपने प्रचार तंत्र से भाजपा ने किसानों के बीच फूट डालने और आंदोलन को बदनाम करने का भी अभियान छेड़ दिया है। यह अभियान उस झूठ का हिस्सा है जिसमें किसानों की आवाज को दबाना है।

भाजपा सरकार ‘सबका साथ, सबका विश्वास‘ का झूठा नारा सिर्फ लोगों को गुमराह करने के लिए ही लगाती है। अन्यथा संविधान प्रदत्त अधिकारों को दरकिनार कर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन पर बर्बर पुलिसिया हमला नहीं कराया जाता। किसानों के समर्थन पर समाजवादी कार्यकर्ताओं को जेल भेजकर भाजपा सरकार ने साबित कर दिया है कि वह फर्जीवाड़ा करने की उस्ताद है। जनता से भाजपा को अपने अवैधानिक, अलोकतांत्रिक कार्य के लिए माफी मांगनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार किसान विरोधी कानून का समर्थन करने में आगे है। वैसे भी इस राज्य में किसान सबसे ज्यादा बदहाल है। ओलावृष्टि, बेमौसम बरसात से बर्बाद फसल का मुआवजा नहीं मिला। गन्ना किसान का बकाया भुगतान नहीं हुआ। किसानों की कर्जमाफी नहीं हुई। किसान को न तो लागत का ड्योढ़ा दाम मिला नहीं उसकी आय दुगनी हुई। अब उसकी खेती को कारपोरेट कम्पनियों की बंधक बनाने, किसान को खेत मालिक की जगह मजदूर बनाने और सरकारी संस्थानों को बेचने या उनको निजी हाथों में सौंपने के काम में ही भाजपा सरकार लगी है।

किसान, मजदूर, छात्र, व्यापारी, अधिवक्ता सहित समाज का हर वर्ग भाजपा सरकार की कुनीतियों का शिकार होकर कराह रहा है। जनहित की एक भी योजना अपने कार्यकाल में नहीं लागू कर पाई है। जब यूपी में कोई विकास हुआ ही नहीं तो अब चार वर्ष बाद मुख्यमंत्री जी औचक कार से निरीक्षण करने के लिए निकलने की घोषणा कर रहे हैं। जनता को भुलावें में डालने की यह साजिश सफल होने वाली नहीं क्योंकि उनकी वादा खिलाफी से जनता भलीभांति परिचित हो गई है। कोई उनसे गुमराह होने वाला नहीं है।

भाजपा सरकार ने और खासकर मुख्यमंत्री ने तय कर लिया है कि जुमलों और हवाई वादों में ही वे अपने बचे खुचे दिन निकाल लेंगे। करने की उनकी न तो नीयत है और नहीं कोई सोच है। मुख्यमंत्री ने हर काम को धुआं कर दिया। भाजपा ने ‘हर फिक्र को धुए में उड़ाते चल‘ देने को ही अपना आदर्श वाक्य बना लिया है। यह संवेदनशून्यता की पराकाष्ठा है। मुख्यमंत्री तो ‘बर्बादियों का जश्न मनाते ही चल‘ रहे हैं।

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