जीवन में दुःख-संघर्ष जितने कम होंगे, सुख-समृद्धि उतनी ही अधिक होगी


महाराज जी भक्तों से कह रहे हैं कि, "तुम्हारे दुख से हमें भी दुख होता है।"

महाराज जी को अपने सब भक्तों की फ़िक्र रहती है और वे चाहते हैं की जीवन में हम लोगों का संघर्ष का समय कम से कम हो। हममें से बहुत से भक्त महाराज जी के बताये मार्ग पर नहीं चलते हैं। कुछ तो कोशिश भी नहीं करते हैं। फलस्वरूप हम लोग बुरे कर्म करते रहते हैं, प्रायः तब जब हम ये नहीं सोचते की जो हम कर रहे हैं, या करने वाले हैं वो क्यों कर रहे हैं ???

बाद में हमारे बुरे कर्मों का फल (छोटे/बड़े-सब), जब वो सर्वशक्तिशाली परमात्मा देता है तो हम महाराज जी से गुहार लगते हैं की हमें इन विपदाओं से निकालिये। ऐसा होना संभव तो होता नहीं है क्योंकि अपने कर्मों का फल और प्रारब्ध को तो सबको काटना ही होता है। हाँ, महाराज जी हमारे कर्म-फल की पीड़ा कभी-कभी क्षीण कर देते हैं, संघर्ष वाले समय का सामना करने का हमें धैर्य भी प्रदान कर देते हैं

यदि हम अपने प्रयासों से महाराज जी पर विश्वास बनाये रख पाते हैं, अपने आप को बार-बार याद दिलाते रहते हैं कि हम अपनी वर्तमान अवस्था में महाराज जी के हुकुम से हैं, मर्ज़ी से हैं लेकिन संकट का समय टल नहीं सकता। ये समय हमें पीड़ा भी देके जाता है। ऐसे में महाराज जी को भी तकलीफ होती है। इसी सन्दर्भ में संभवतः महाराज जी किसी भक्त से कह रहे हैं कि तुम्हारे दुख से हमें दुख होता है।

संभवतः इसीलिए इस फेसबुक के युग में भी महाराज जी अपने उपदेशों और उनकी सरल शब्दों में व्याख्या के माध्यम से हम सबसे जुड़कर हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं, जिससे हम बुरे कर्म, कम से कम करें, फलस्वरूप हमारे जीवन में दुःख-संघर्ष भी कम से कम हों। जब हमारे जीवन में दुःख-संघर्ष कम होंगे तो सुख-समृद्धि और शांति अधिक होगी और जब महाराज जी के भक्तों के जीवन में सुख होगा तो महाराज जी को भी अच्छा लगेगा।

अर्थात महाराज जी भक्तों के दुःख में दुखी और भक्तों के सुख में सुखी होते हैं। तदनुसार वर्तमान में महाराज जी के लिए हमारी सच्ची भक्ति उनके उपदेशों पर चलने में ही है। इसके लिए संकल्प और धैर्य की आवश्यकता होती है। वैसे महाराज जी के उपदेशों (उनके मुख्य उपदेशों का उल्लेख पेज के Files/ फाइलें के शीर्षक में है) पर चलना उनके सच्चे भक्तों के लिए इतना कठिन भी नहीं है। सामर्थ अनुसार ईमानदार कोशिश तो कोई भी कर सकता है (महाराज जी सब देखते हैं) अपने ही कल्याण के लिए और महाराज जी के प्रिय बनने के लिए।

महाराज जी सबका भला करें।

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