शीघ्र घोषित की जाएगी गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में बल्क लैण्ड नीति - मुख्य सचिव


 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, राजेन्द्र कुमार तिवारी ने निर्देश दिये हैं कि नए वर्ष में उद्योगों की समस्याओं के निवारण से संबंधित बैठकों में निस्तारित प्रकरणों पर लिए गए अंतिम निर्णयों को समयबद्ध रूप से लागू किया जाए तथा सम्बंधित विभागों के अधिकारी बैठकों में पूरी तैयारी से आएं एवं सुनिश्चित करें कि उद्योगों के प्रकरणों को अनावश्यक रूप से विलम्बित नहीं किया जाए।

मुख्य सचिव आज लोक भवन स्थित अपने कार्यालय में उद्यमियों की समस्याओं के सम्बंध में ‘इन्वेस्ट यूपी’ की उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त-आलोक टण्डन, अपर मुख्य सचिव, औद्योगिक विकास- आलोक कुमार, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा- अरविन्द कुमार, अपर मुख्य सचिव, कृषि- देवेश चतुर्वेदी, अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई- नवनीत सहगल की उपस्थिति में 7 प्रकरणों पर विचार-विमर्श किया गया तथा समाधान हेतु निर्देश दिए गए।  

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में 50 एकड़ से बड़े भूखण्डों (बल्क लैण्ड) के रख-रखाव शुल्क को युक्तिसंगत बनाने हेतु नई नीति जारी करने के लिए आवश्यक कार्यवाही वर्तमान माह (जनवरी) के अन्त तक पूर्ण कर ली जाए। यह निर्देश मे. अंकुर उद्योग लि., गोरखपुर के प्रकरण के समाधान हेतु मुख्य कार्यपालक अधिकारी, गीडा को दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप गीडा में क्रियाशील अनेक इकाइयों को लाभ होगा।

मे. जेआरजी फूड्स के मण्डी शुल्क में छूट से सम्बंधित प्रकरण में अपर मुख्य सचिव, कृषि विभाग, श्री देवेश चतुर्वेदी द्वारा सूचित किया गया कि भविष्य में मण्डी शुल्क में छूट के प्रकरणों में कर की दर मेें कमी किये जाने के प्राविधान को समाप्त कर दिया गया है तथा उ.प्र. औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के अन्तर्गत समस्त पात्र इकाइयों को मण्डी शुल्क में 05 वर्ष तक पूर्ण छूट मिलेगी। 

मेसर्स सदाहारी शक्ति प्रा. लि., फतेहपुर के पूर्व इकाई के लम्बित विद्युत बिल के प्रकरण में निर्णय किया गया कि विभिन्न अधिनियमों, नियमों के अन्तर्गत् अथवा जिलाधिकारी द्वारा उद्योग विभाग, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों अथवा निजी स्रोतों से प्राप्त भूमि पर स्थापित डिफाॅल्टर इकाई की नीलामी करने पर पूर्व इकाई के देयों के लम्बित होने की दशा में नीलामी में क्रय की गई इकाई पर बकाया विद्युत देयों की वसूली क्रेता इकाई से न कर, पूर्व इकाई तथा सम्बन्धित वित्तीय संस्थाओं से की जानी चाहिए। इस सम्बंध में मुख्य सचिव ने निर्देशित किया कि पुरानी इकाई के विक्रय या स्थानांतरण से पूर्व क्रेता के समस्त देयों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किए जाने के लिए शासनादेश निर्गत किया जाए।

अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा, अरविन्द कुमार ने सूचित किया कि विद्युत विभाग के बकाएदारों की सूची आनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई, अतः नीलामी अथवा विक्रय करने वाली संस्थाएं नीलामी करने से पूर्व ही पुरानी इकाई पर लम्बित देयों की सूचना प्राप्त कर सकती हैं। 

बैठक में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, ऊर्जा विभाग, आवास विभाग, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग, कृषि विपणन विभाग, राजस्व विभाग, नगर विकास विभाग, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण एवं उ.प्र. राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) से सम्बंधित 07 प्रकरणों पर विचार-विमर्श किया गया तथा 05 प्रकरणों का अंतिम समाधान करते हुए शेष 02 प्रकरणों में सम्बंधित विभागों को समयबद्ध रूप से त्वरित निस्तारण हेतु निर्देश दिए गए।

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