बेईमानी का धन कोई भी उपभोग नहीं कर सकता

 

महाराज जी भक्तों को जीवन उद्धार करने के और जीवन में कम से कम दुःख पाने के कुछ तरीके बता रहे हैं:-
 
1. देव दरसन: सेवा और जप से, कीर्तन से, पाठ से कल्याण होता है -जिसका मन जिसमें लग जाय।
2. बेखता, बेकसूर कोई गाली दे धक्का मारे तुम्हें रंज न हो। कोई तारीफ करे खुश न हो। इसमें सबसे नीचा अपने को मान ले। दीनता आ जाय शान्ति मिल जाय - इस उपदेश के बारे में समय समय पर हम इस पटल पर चर्चा करते रहे हैं।
3. झूंठ न बोलो। किसी का जीव या जीविका जाती हो तो झूठ बोलने में दोस नहीं है।
4. अपनी सच्ची कमाई का अन्न खाव। बेइमान का अन्न न खावे-हमारे सभी विकारों में सबसे निंदनीय यही होता है क्योंकि जब हम बेईमानी से, छल कपट से धन -संपत्ति संचित करते हैं तो स्वयं तो ऐसे कर्मों के दुष्परिणाम आगे -पीछे सहते ही हैं, पर जैसे महाराज ने बताया हैं जब हम बेईमानी से पैसा कमाते हैं तो अपनी वजह से अपनों का भी अहित करते हैं क्योंकि बेईमानी के धन का उपभोग वे भी करते हैं। इसलिए महाराज जी के भक्तों को छल- कपट और बेईमानी से धन -संपत्ति संचित करने से बचना चाहिए।
5. सब के दुःख -सुख में सामिल रहो।
6. सादा भोजन, सादे कपड़े पहनौ। अपने परिवार (धर्म) का पालन करौ।
7. एक नीच जाति का बालक हो, उसको अपने पुत्र समान मानो, जात-पात मानना और महाराज जी का सच्चा भक्त होना- ये दोनों बातें संभव हो ही नहीं सकती हैं !! अब इस बारे में हमें क्या करना है इसका निर्णय हमें ही करना है।
8. किसी के कुछ काम-काज हो बिना बुलाये जावै। काम सधै कर दो-दूसरों के कार्यों में निस्वार्थ भाव योगदान देना। बहुत बातें हैं कहां तक लिखें। कोई चल नहीं सकता।

गृहस्थों के लिए संभवतः इन सब पर चलना आसान नहीं होगा लेकिन हम कुछ पर या जितने अधिक उपदेशों पर चल सकें उतना ही हमारा जीवन सार्थक हो सकता है। तदनुसार भविष्य में सुख-समृद्धि और शांति की प्राप्ति हो सकती है, संभवतः निकट भविष्य में भी, यदि उस सर्वशक्तिशाली परम आत्मा की मर्ज़ी और महाराज जी की कृपा रहे तो फैसला हमें करना है।
 
महाराज जी की कृपा सब भक्तों पर बनी रहे।

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