ट्राइब्स इंडिया आदि महोत्सव में मनाया गया आदिवासी कारीगर दिवस


रविवार का दिन दिल्ली हाट के आदि महोत्सव में एक व्यस्त रविवार था क्योंकि वहाँ पर आए दर्शकों में समृद्ध आदिवासी कला और शिल्प का भरपूर आनंद लेने के लिए होड लगी हुई थी। पखवाड़े भर चलने वाले उत्सव में आदिवासी कला और हस्तशिल्प की विस्तृत विविधता मुख्य आकर्षण रहा। यह महोत्सव आदिवासी शिल्प, संस्कृति और खान-पान के विभिन्न व्यंजनो को प्रदर्शित करने का महोत्सव है।

भारत भर से लगभग 200 स्टालों के साथ, आदि महोत्सव में एक छोटा सा भारत मौजूद है जहाँ आदिवासी कारीगरों, बुनकरों, कुम्हारों, कठपुतलियों और कढ़ाई करने वालों की उत्तम शिल्प परंपराएँ- सभी एक ही स्थान पर मौजूद हैं। आगंतुक कला कृतियों की एक विस्तृत श्रृंखला से अपनी पसंद की कृति ले सकते हैं, जैसे कि वार्ली शैली या पत्ताचित्र शैली की चित्रकला; पूर्वोत्तर के वांचो और कोन्याक जनजातियों की हार के लिए डोकरा शैली में दस्तकारी की गई ज्वैलरी और जीवंत वस्त्रों और सिल्क; रंग-बिरंगी कठपुतलियों और बच्चों के खिलौनों से लेकर पारंपरिक बुनाई जैसे डोंगरिया शॉल और बोडो बुनाई; बस्तर के लौह शिल्प से लेकर बांस शिल्प और बेंत के फर्नीचर के लिए, मिट्टी के बर्तन जैसे कि नीले बर्तन और प्रसिद्ध लोंगपी मिट्टी के बर्तन, कुछ भी अपनी पसंद की वस्तु यहाँ से खरीदी जा सकती है।


इस आयोजन में कुछ वरिष्ठ गणमान्य लोगों ने भी शिरकत की। प्रधानमंत्री के सलाहकार भास्कर खुल्बे ने आदि महोत्सव का दौरा किया और दुकानों और उनके सामान में गहरी दिलचस्पी ली, जिसमें नकली वन धन केंद्र स्थापित किया गया था। विशेष रूप से, उन्होंने उस स्टाल में बहुत रुचि दिखाई थी, जहां 50 आदिवासी जीआई उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। खुल्बे ने स्टालों की सराहना करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हुई कि ट्राइफेड ने जीआई टैग किए गए उत्पादों को बढ़ावा देने और एक ब्रांड में तब्दील करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाया है, इस प्रकार आदिवासी कारीगरों को सशक्त बनाया गया है। यह आदि महोत्सव देश भर के सभी आदिवासी कारीगरों को एक ही स्थान पर लाने का एक शानदार तरीका है।”

हथकरघा और हस्तशिल्प और प्राकृतिक उत्पादों की खरीदारी के अलावा, कोई भी आदिवासी खान-पान व्यंजनों का सबसे अच्छा आनंद ले सकता है और आदि महोत्सव में आदिवासी कलाकारों द्वारा मनमोहक  प्रदर्शन के भी मज़े ले सकता है। आदि महोत्सव- आदिवासी शिल्प, संस्कृति और वाणिज्य की आत्मा का उत्सव, दिल्ली हाट, आईएनए, नई दिल्ली में 15 फरवरी, 2021 तक सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक जारी है। आदि महोत्सव में जाएँ और "लोकल फॉर वोकल अर्थात, स्थानीय के लिए मुखर" आंदोलन के साथ आगे आए  # आदिवासियों की बनाई वस्तुएं खरीदें।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत भारतीय आदिवासी सहकारी विपणन विकास संघ (टीआरआईएफईडी-ट्राइफेड), आदिवासी सशक्तिकरण के लिए काम करने वाली प्रमुख संस्था के रूप में, कई पहलें कर रहा है जो आदिवासी लोगों की आय और आजीविका में सुधार करने में मदद करती हैं, इसके अलावा यह संस्था, जनजातीय लोगों के जीवन और परंपरा का के संरक्षण के लिये पहल कर रही है। आदि महोत्सव एक ऐसी पहल है जो इन समुदायों के आर्थिक कल्याण को सक्षम करने और उन्हें मुख्यधारा के विकास के साथ लाने में मदद करती है।

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