आखिर कोई तो मध्यस्थता करे



मामले को निस्तारित करने का प्रयास करना चाहिए ना कि पोलिस कर्मियों को स्टील्नेस स्टील का कवच देकर आयरन मैन बनाने का।

कौन सा किसानो को गोलियां चलानी है। सड़क पर चुपचाप बैठे है। हालांकि इसबार जुटी भीड़ में कुछ अशांति महसूस हो रही है इसकारण प्रशासन को विशेष सावधानी आवश्यक है। पोलिस उन्हें पीट सकती है वे मार खा लेंगे लेकिन आम आदमी मारपीट या हिंसा करेगा तो वे माकूल जवाब देंगे, ऐसा उनके नेताओ कहना है।

प्रयास किया जाए कि बाहरी लोग जाकर उद्दंडता ना करें, जो उपद्रवी दिखे पोलिस को चाहिए कि वे उनके उनकी चौथी और पांचवी कर्मेन्द्रीय में यह स्टील की लाठी स्पर्श करा दें।

वैसे पिछले कुछ माह से इस आंदोलन ने सरकार को इतना उलझाया हुआ है कि वह अन्य मुद्दों पर ध्यान ही नही दे पा रही है। वह किसानों को बचाना भी चाहती है और उनकी हिंसा को शांत करना भी।

उधर यूटूबर्स ऐसी रिपोर्टिंग कर रहे है मानो सरकार किसानों पर परमाणु बम गिराने की योजना बना रही हो। यह अच्छी बात नही है। अपन ही घर मे आग लगाने के पहले सौ बार सोचना चाहिए। सरकार से दुश्मनी निकालने के लिए आग में घी डालना उचित नही है।

आखिर कोई तो मध्यस्थता करे! दोनों पक्षो की तनातनी और ईगो के चलते ऐसे कब तक चलेगा? 


(निखिलेश मिश्रा)

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