मनुष्य योनि में जन्म लेना बड़े भाग्य की बात होती है

 


महाराज जी भक्तों को उपदेश रहे कि: 

वजहन जग में आय के, करिये ना तुम मान।

दया धर्म ना छोड़िये, जब तक घट में प्रान॥

महाराज जी ने हमें बताया है की मनुष्य योनि में जन्म लेना बड़े भाग्य की बात होती है। संभवतः इसलिए क्योंकि केवल मनुष्य योनि से ही मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। अर्थात बार -बार माँ की कोख से संसार में आना और फिर अर्थी पर चढ़ कर चले जाने की प्रक्रिया से मुक्ति मिल सकती है। या उससे भी बेहतर - ना केवल उस प्रक्रिया से मुक्ति बल्कि हम आत्माएं, अपने मूल अर्थात उस सर्वशक्तिशाली परम आत्मा में वापस विलीन हो सकते हैं। हमें से अधिकतर लोगों के जीवन में प्रायः सुख का तो एक ही भाग होता तो परन्तु दुःख के तीन भाग होते हैं -वो भी अलग -अलग रूपों में ……..

इसलिए हमें प्रयत्न करना चाहिए की ये हमारा मनुष्य का तन (शरीर/ जीवन) व्यर्थ न जाये। 

श्री वजहनजी का सरल परन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण पद यहाँ पर महाराज जी भक्तों को समझा रहे हैं की मनुष्य की योनि में जन्म पाकर, हमें किसी भी बात का अहंकार करने से बचना चाहिए फिर चाहे वो अपनी धन -संपत्ति का हो, पद का हो, जाति हो, रूप का हो, अपने आप को ज्ञानी मानने का हो, बड़ा भक्त मानने का हो इत्यादि। क्योंकि अहंकार के वशीभूत होकर हम (चाहे कुछ पल के लिए ही सही) दूसरों को दुःख पहुंचा देते हैं परन्तु इसका फल कभी -कभी हम आजीवन सहते हैं या अगले जन्म में तक लेकर जाते हैं - अगर हमारी वजह से दूसरे बहुत अधिक या कई बार आहत होते हैं।

इसलिए हमारा हित इसी में है की अहंकार के बजाय हम विनम्र रहें, अपने आप को याद दिलाते रहें जो हम को सुख -समृद्धि, पद, रूप, ज्ञान इत्यादि प्राप्त है वो जब तक है, जितना है -उस परम -आत्मा की कृपा से ही है। महाराज जी के आशीर्वाद से है। फलस्वरूप इसके लिए हमें उनका कृतज्ञ रहना है -प्रतिदिन।

महाराज जी आगे समझाते हैं कि जब तक हमारे शरीर में प्राण है, हम जीवित हैं तब तक दूसरों के लिए, ज़रूरतमंदों के लिए दया की भावना रखना और फिर वैसे ही कर्म करना हमारा परम धर्म होना चाहिए  -फिर चाहे वो किसी भी धर्म या जाति का हो - बिना अपने किसी स्वार्थ के पर अपने सामर्थ अनुसार। अपने जीवन में दुखों के अवधि को कम रखने के लिए और सुख की अवधि को बढ़ाने के लिए ये आवश्यक है !!  

यही उस सर्व शक्तिशाली परम आत्मा के लिए और महाराज जी के लिए (भी) -हमारी सबसे बड़ी और सच्ची पूजा है।

महाराज जी की कृपा सब भक्तों पर बनी रहे।

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