यूपीएसएसएससी द्वारा पीईटी कराना आयोग और सरकार का सनक भरा फैसला- वंशराज दुबे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा निकाली गई भर्तियों के लिए द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली की अनुमति योगी सरकार द्वारा मिल गई है। यूपीएसएसएससी के अंतर्गत होने वाली परीक्षाओं की भर्ती के लिए अब केवल वही अभ्यर्थी पात्र होंगे, जो पहली अर्हता परीक्षा (पीईटी) को पास कर लिया होगा।

योगी सरकार के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश आम आदमी पार्टी की छात्र विंग (सीवाईएसएस) प्रदेश अध्यक्ष वंशराज दुबे ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है। छात्र विंग के प्रदेश अध्यक्ष वंशराज दुबे ने कहा कि आदित्यनाथ की सरकार उत्तर प्रदेश के नौजवानों को परीक्षा प्रकिया को जटिल बना कर सिर्फ और सिर्फ उलझाना चाहती हैं, जिस सरकार में एक परीक्षा प्रक्रिया को पूरा होने में 4 से 5 साल लग जाते है ऐसे में पीईटी आने के बाद द्विस्तरीय परीक्षा प्रणाली होने नौजवानों के सामने और भी संकट का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में यूपीएसएसएससी में आने वाली नौकरियों की तैयारी करने वाले नौजवानों में सरकार के सनक में लिए गए फैसले से भारी असहमति है। उन्होंने कहा कि यदि कोई छात्र पीईटी में किसी कारणवश कुछ नंबर से चूक गया तो उसके हाथ से अगले चरण की परीक्षा निकल जाएगी या कहें कि उसका साल बर्बाद हो जाएगा। ऐसे में सरकार और आयोग को चाहिए कि छात्रों के हितों का ध्यान रखते हुए पीईटी को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) जैसे केवल क्वालीफाइंग नेचर का कर देना चाहिए और एक प्रतिशत तय कर देना चाहिए हर वर्ग के लिए कि जो इतना प्रतिशत लाएगा उसको मुख्य परीक्षा या अगले चरण की परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा।

पीईटी को केवल मेरिट के आधार पर लागू कर देने से बहुत से नौजवान बाहर हो जाएंगे, खासकर उत्तर प्रदेश के नौजवान ही अपनी राज्य की नौकरियों से वंचित रह जाएंगे क्योंकि सिलेबस ऐसा है कि बगल में बैठा दूसरे राज्य का छात्र भी इसको कर लेगा क्योंकि इस सिलेबस में राज्य स्तरीय भर्ती के लिए कोई अलग से प्रश्न पूरे पाठ्यक्रम में नहीं दिख रहा है। सरकार दूसरे राज्यों के छात्रों का आरक्षण निश्चित करें। जिससे दूसरे प्रांतों से एक निश्चित संख्या में ही लोग उत्तर प्रदेश में नौकरियां ले पाए। वंशराज दुबे ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की कार्यप्रणाली पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं को लगातार इस सरकार ने गुमराह करने का कार्य किया। आदित्यनाथ सरकार में विगत चार साल के कार्यकाल में इस आयोग की सुस्ती का आलम यह है कि अभी तक 22 भर्तियां किसी न किसी स्तर पर अधर में लटकी हुई हैं।

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