निजीकरण की लड़ाई बैंककर्मियों के साथ आमजनता की लड़ाई है- के. के. सिंह

लखनऊ। केन्द्र सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको को निजीकरण कर बेचने की साजिश के तहत आज दूसरे दिन भी यूनाइटेड फोरम आॅफ बैंक यूनियन्स के आवाह्न पर बैंककर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल जारी रही। हड़ताल के चलते सभी सरकारी बैंको के शाखाओं एवं कार्यालयों में ताले लगे रहे।
 
बैंक हड़ताल पर इण्डियन बैंक (पूर्व इलाहाबाद बैंक) हजरतगंज में सभा को सम्बोंधित करते हुये काम0 के.के.सिंह, महामंत्री, एन.सी.बी.ई. ने बताया- ‘‘बैंक में जनता के जमा धन पर पूॅजीपतियों और नेताओं की नजर है बैंको के निजीकरण होने पर सरकार उन्हें बड़े लोन स्वीकृत करायेगी फिर ऋणलेने वाला ऋण को एनपीए कराने के बाद मात्र 10 या 15 प्रतिशत धनराशि देकर ऋण का सेटलमेंट करा लेगा या देश छोड़कर भाग जायगा, विजय माल्या, नीरव मोदी, चन्दा कोचर आदि प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। जनता अब समझ चुकी है इसलिये आमजन हमसे जुड़ रहा है क्योंकि बैंक निजीकरण की लड़ाई बैंककर्मियों के साथ आमजनता की लड़ाई है।’’
 
सभा में आॅयबाक (आल इण्डिया बैंक आफीसर्स कन्फेडरेशन) के अध्यक्ष पवन कुमार ने बताया- एक ओर वरिष्ठ कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति होने के बावजूद पर्याप्त मात्रा में नये कर्मचारियों की भर्ती न होने से प्रति कर्मचारी कार्य का बोझ बढ़ता जा रहा है दूसरी ओर सरकार ने मनमाने तरीके से बैंको का विलय किया, अब तो बैंको का निजीकरण कर बेचने की तैयारी कर दी है, हम ऐसा होने नहीं देंगे। ए.आई.बी.ई.ए. (आल इण्डिया बैंक इम्पलाइज एसोसियेशन) के काम0 दीप बाजपेई ने कहा-‘‘सरकार जनता की गाढ़ी कमाई, पूॅजीपतियों के हितों के लिये, बैंको का निजीकरण करके उन्हें सौंपना चाह रही है। यह जनता के साथ धोखाधड़ी है। बैंककर्मी तथा आम जनता इसे सफल नहीं होने देंगे।’’
 
  
फोरम के प्रदेश संयोजक वाई.के.अरोडा ने कहा- सरकार बैंको का निजीकरण करके पूॅजीपतियों के निजी स्वार्थ पूरा करना चाहती है। बैंककर्मी किसी भी कीमत पर सरकार की यह मन्शा पूरी नहीं होने देगी। जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया सरकार बैंको का निजीकरण कर आमजन की सामान्य बैंकिग सुविधाए छीनना चाहती है यह आन्दोलन बैंककर्मियों का ही नहीं बल्कि आमजन का आन्दोलन है। मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि विभिन्न स्रोतो की जानकारी के अनुसार दो दिनों की हड़ताल से लखनऊ में लगभग 5000 करोड़ तथा प्रदेश में 60000 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा।
 
हड़ताल के दोनो दिन सरकारी बैंको के लखनऊ जिले की 905 शाखाओं के 10000 बैंककर्मी तथा प्रदेश की 14000 शाखाओं के 2 लाख बैंककर्मी शामिल रहें। लखनऊ में 990 एवं प्रदेश के 12000 ए.टी.एम. मशीनों में से कई मशीनों में कैश समाप्त होने से लोग अपना पैसा नहीं निकाल सके। आॅनलाइन बैंकिग भी नेटवर्क समस्या के कारण लोगो को दिनभर रूलाता रहा। हड़ताल के कारण पेन्शनधारकों, वेतनभोगियों एवं आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ा। शाखाओं में जमा व निकासी, एफ.डी.रिन्यू, ऋण सम्बन्धी कार्य, सरकारी खजाने से जुड़े एवं व्यापार से जुडे़ कामों पर भारी असर पड़ा।

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