दुनिया में किसी को सुधारना चाहते हो तो केवल स्वयं को सुधारो


दूसरे व्यक्तियों में सुधार करने से पहले हमें अपने सुधार की बात पहले सोचनी होगी दूसरों से मधुर व्यवहार की अपेक्षा रखने से पूर्व हमें स्वयं अपने व्यवहार को मधुर रखना होगा कई बार हमारा खुद का व्यवहार कितना निम्न और अशोभनीय हो जाता है।

दूसरों की कमजोरियों और दुर्बलताओं का हम बहुत मजाक उड़ाते हैं एकदम आग बबूला भी हो जाते हैं, कभी हमने विचार किया कि हमारे स्वयं के भीतर भी कितने दोष-दुर्गुण और वासना भरी पड़ी है यह अलग बात है हमने उसके ऊपर सच्चरित्र की झूठी चादर ओढ़ रखी है।

इस जगत में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं जो पूर्णतः भला हो या बुरा हो। परिस्थिति के हिसाब से भली बुरी छवि सामने आती रहती है यदि हम दूसरों में बुराई, अभाव या अपकार ही देखते रहेंगे तो जीवन को नरक बनते देर ना लगेगी याद रखना दुनिया में किसी को सुधारना चाहते हो तो केवल स्वयं को सुधारो।

Popular posts from this blog

अनेक बातें जो हम समझ नहीं पाते

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आॅनलाईन ट्रांसफर सिस्टम विकसित किये जाने की प्रगति की समीक्षा बैठक की गई संपन्न

पीसीएस मणि मंजरी राय आत्महत्या मामले में नया खुलासा, ड्राइवर गिरफ्तार