AAP ने शुरू की "आम आदमी की रसोई", सांसद संजय सिंह ने किया उद्घाटन



लखनऊ : कोरोना से मौत पर 50 हजार मुआवजा, अनाथ बच्चों को फ्री शिक्षा और पेंशन देकर दिल्‍ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना काल में सराहनीय काम किया है। आपदा के इस काल में योगी आदित्‍यनाथ को कोरोना से मौत पर मुआवजा, अनाथ बच्चों को फ्री शिक्षा और पेंशन देने की घोषणा करनी चाहिए। बुधवार को आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रभारी राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह ने ये बातें कहीं। महामारी में गरीब-मजदूरों की मदद को लेकर योगी सरकार को घेरते हुए मुख्‍यमंत्री को दिल्‍ली सरकार से सीख लेने की नसीहत दी। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ को जनता की मदद के लिए दिल्‍ली की केजरीवाल सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से प्रेरणा लेनी चाहिए। वहां केजरीवाल सरकार राशन कार्ड नहीं है, फिर भी मुफ़्त राशन दे रही है। कोरोना से मौत पर 50 हजार का मुआवजा दिया जा रहा है। कमाने वाले सदस्य की मौत पर ₹ 2500 की पेंशन का प्रबंध है। जो बच्चे अनाथ हो गए, उन्हें 25 साल की उम्र तक ₹ 2500 महीने दिए जाएंगे, साथ ही उनकी शिक्षा मुफ्त की जाएगी। संजय सिंह ने मांग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ प्रदेश की जनता को राहत देने के लिए यहां भी ऐसे कदम उठाएं उन्होंने कहा कि अगर यूपी सरकार बर्बाद हो चुके लोगों को राहत नहीं पहुंचा पाती तो चुनाव बाद ये काम आम आदमी पार्टी की नई सरकार करेगी ।

संजय सिंह ने कहा कि करोना की महामारी के दौरान पूरे प्रदेश से रूह को कंपा देने वाली खबरें सामने आ रही हैं और उत्तर प्रदेश में आदित्य नाथ की सरकार मौत का आंकड़ा छुपाने में कितनी ताकत लगा ले, लेकिन गांव गांव में जो दृश्य सामने आ रहे हैं वो अत्यंत भयावह हैं, डराने वाले हैं। कानपुर, उन्नाव, लखनऊ,  बलिया, गाजीपुर, प्रयागराज, बिजनौर सहित उत्तर प्रदेश के लगभग हर जिले में गांव की स्थिति का आकलन करेंगे तो गांव गांव में कोरोना के कारण लोगों की मौत हो रही हैं। इसीलिए श्मशान में लाशों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। लोगों के पास अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने का इंतजाम नहीं है। उनको लकड़िया नसीब नहीं हो रहीं। प्रयागराज के घाट पर जिनको लकड़िया नसीब नहीं हुईं, उन्‍होंने अपने परिजनों का शव हिंदू रीति रिवाज के विपरीत बालू खोदकर जमीन में दफन कर दिया। यह उत्तर प्रदेश में लोगों की मजबूरी की दशा है। यह उत्तर प्रदेश के लोगों की पीड़ा है, जिसको शासन और प्रशासन नजरअंदाज करने में जुटा हुआ है। आदित्यनाथ की सरकार ने दावा किया कि ₹5000 अंतिम संस्कार के लिए मिलेगा। अगर सरकारी योजनाएं सही रूप से जमीन पर लागू हो रही हैं तो फिर क्यों लोग अपने परिजनों के शव बालू और रेत में दफन कर रहे हैं ? इसका जवाब दें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ।  प्रदेश में लोगों को मरने के बाद कफन और लकड़ी भी नसीब नहीं हो रही है। 

संजय सिंह ने कहा कि किसी जिले में कोरोना की जांच नहीं हो रही। गांव गांव में खांसी, बुखार फैला हुआ  है। लोगों को पता ही नहीं चल रहा है कि कोरोना है या नहींं। अस्पतालों में वेंटीलेटर नहीं हैं, बेड नहीं हैं। लोग अस्पताल में पहुंचने से पहले दम तोड़ दे रहे हैं। उन्हीने मांग की कि प्रदेश सरकार बगैर विलंब किए 75 जिलों में सभी ब्लॉक के अंदर करोना की जांच केंद्र खोले । बीमारी छुपाने से, पर्दा डालने से या संकट के सामने ताली बजाने और पीठ थपथपाने से समाधान नहीं होगा। इसके लिए जरूरी है संकट को जानिए। संकट को रोकने का इंतजाम करिए। जिस जिले में दाह संस्कार के लिए लकड़ी का इंतजाम नहीं हो रहा है ऐसे जिले के डीएम व प्रशासन के अधिकारियों को निलंबित किया जाए। यह गुनाह है, पाप है। बलिया के अंदर शव को पेट्रोल और टायर डाल करके जलाया जा रहा है। प्रदेश की जनता महामारी की मार से कराह रही है, लेकिन योगी सरकार सच छिपाने में लगी है। पर्दा डालकर पीठ थपथपाने से कुछ नहीं होगा। यह सच्‍चाई स्‍वीकार करके मुकाबला करने का वक्‍त है। इसके लिए हर ब्‍लॉक में कोरोना जांच केंद्र खोले जाने चाहिए। 

कोरोना महामारी की त्रासद परिस्थितियों के बीच हर किसी को एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आना होगा। यह सामूहिक भागीदारी के साथ महामारी से लड़ने का वक्‍त है। इसी सोच के साथ 'आप' की रसोई की शुरुआत की जा रही है, जो आपदा के इस काल में हर जरूरतमंद को भोजन मुहैया कराएगी। बुधवार को आप की रसोई का उद्घाटन करते हुए संजय सिंह ने बताया कि आप की रसोई पार्टी कार्यकर्ताओं का सराहनीय प्रयास है। यहां प्रतिदिन हजारों लोगों का खाना  तैयार होगा।  अन्‍य जिलों में भी पार्टी कार्यकर्ता इस तरह से निःशुल्क ऑटो एंबुलेंस, चिकित्सा परामर्श के जरिए जरूरतमंदों की सेवा में जुटे हुए हैं।

आप प्रदेश अध्‍यक्ष सभाजीत सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमण से सिर्फ तीन शिक्षकों की मौत का दावा करना सरकार की संवेदनहीनता का प्रत्‍यक्ष प्रमाण है। हाईकोर्ट भी कह रही यूपी की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे है। शिक्षकों के लिए ड्यूटी के दौरान सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर जिन 1621 शिक्षकों-कर्मचारियों की मौत हुई थी, शिक्षक संगठनों की इस रिपोर्ट को खारिज करके सरकार सिर्फ तीन लोगों के दम तोड़ने की बात कह रही है। यह शर्मनाक है। आम आदमी पार्टी दिवंगत शिक्षक एवं कर्मियों के परिजन लिए पहले से एक करोड़ रुपये मुआवजे सहित एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रही है। पीडि़त परिवारों के घर जाकर आप नेता उनसे मिलेंगे और उनके साथ उनकी न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।


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