कोविडशील्ड वैक्सीन लगवाने के बावजूद एंटीबोडी न बनने पर पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत


लखनऊ। लखनऊ के रुचिखंड निवासी प्रताप चन्द्र नें आशियाना थाना में सीरम कंपनी के मालिक अदर पूनावाला, ड्रग कंट्रोल डायरेक्टर, स्वास्थ संयुक्त सचिव लव अग्रवाल, ICMR डायरेक्टर बलराम भार्गव, राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन डायरेक्टर अपर्णा उपाध्याय और WHO के डायरेक्टर के ऊपर धोखाधड़ी और जान से मारने के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराने की तहरीर थानाध्यक्ष पुरुषोत्तम गुप्ता को दिया, थानाध्यक्ष नें कहा उच्च अधिकारीयों से भी मिलकर अवगत करा दीजिये, तत्पश्चात डिप्टी कमिश्नर सीओ कैंट रश्मि सिंह को भी अवगत कराकर शिकायती तहरीर प्राप्त करा दिया।

तहरीर में लिखा कि मैंने सीरम इंस्टीटयूट ऑफ़ इंडिया द्वारा बनाई गई और सरकारी संस्थान ICMR, स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन द्वारा मान्यता प्राप्त और उपलब्ध कराया जाने वाला कोविडशील्ड वेक्सिन तथा विभिन्न समाचार पत्र पत्रिका, दूरदर्शन पर वेक्सिन लगवाने के लिए प्रेरित किये जाने हेतु सरकारी विज्ञापनों से प्रेरित होकर दिनांक 8 अप्रैल 2021 को आशियाना थाना, रूचि खंड-२, स्थित गोविन्द हास्पिटल में पहला डोज लगवाया, वेक्सिन का बैच नं. 4121Z039 था (प्रमाण पत्र संलग्न) दूसरे डोज की निर्धारित तिथि 28 दिन बाद की दी गई थी, परन्तु 28 दिन बाद जाने पर बताया गया कि अब दूसरी डोज 6 हफ्ते में लगेगी, और फिर सरकार द्वारा घोषणा की गई कि अब 6 नहीं बल्कि 12 हफ्ते बाद दूसरी डोज लगेगी।


वेक्सिन लगवाने के उपरांत स्वास्थ ठीक नहीं रह रहा था और ICMR तथा स्वास्थ्य मंत्रालय की 21 मई 2021 को प्रेस वार्ता दूरदर्शन पर देखा और द-हिन्दू, बिजनेस लाइन पोर्टल पर पढ़ा कि ICMR के डायरेक्टर जनरल बलराम भार्गव नें फिर से स्पष्ट कहा कि “With the very first dose of Covishield vaccine, “good levels” of antibodies are produced in the body, but with Covaxin, adequate immune response is triggered only after the second dose.” (छायाप्रति संलग्न) “यानि कोविडशील्ड वेक्सिन” के पहले डोज के बाद अच्छे लेविल का एंटीबॉडी बनता है | अतः  मैंने 25 मई 2021 को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त लैब थायरोकेयर से अपना COVID ANTIBODY GT टेस्ट कराया जिससे मालूम हो सके कि कोविडशील्ड वेक्सिन जो कि एंटीबॉडी बनाने के लिए लगवाई थी, उससे एंटीबॉडी बनी या नहीं, लेकिन 27 मई 2021 को रिपोर्ट निगेटिव आई, यानि जिस एंटी बॉडी को बनाने हेतु वेक्सिन लगवाया था वो नहीं बना बल्कि प्लेटलेट्स भी 3 लाख से घटकर 1.5 लाख काउंट हो गई (रिपोर्ट संलग्न) जो न सिर्फ मेरे साथ धोखा हुआ बल्कि जान का बड़ा जोखिम बना हुआ है।


ICMR, स्वास्थ्य विभाग नें बताया था कि इस एंटीबॉडी वेक्सिन लगाने से एंटीबॉडी डेवलप होगी यानि पोजिटिव होगा, भले कम या ज्यादा हो सकता है, जो कि कोरोना से बचने का सुरक्षा कवच होगा, लेकिन मेरे केस में तो रिपोर्ट निगेटिव यानि एंटीबॉडी बनी ही नहीं बल्कि सामान्य प्लेटलेट भी आधे से भी कम रह गए हैं जिससे संक्रमण का खतरा ज्यादा हो गया है जिससे मेरी किसी भी समय मृत्यु हो सकती है | ये सरासर मेरे साथ धोखाधड़ी और मै इसे अपने हत्या के प्रयास का विषय मानता हूँ |

वेक्सिन बनाया- सीरम इंस्टीटयूट ऑफ़ इंडिया, 212/2, Hadapsar, Off Soli Poonawalla Road, Pune जिसके अदर पूनावाला (CEO) हैं |

वेक्सिन स्वीकृत किया- डायरेक्टर जनरल Central Drugs Standard Control Organization - FDA Bhavan, ITO, Kotla Road, N.Delhi.

वेक्सिन स्वीकृत किया– डायरेक्टर WHO - World Health House, Indraprastha Estate, Mahatma Gandhi Marg, New Delhi .

वेक्सिन की घोषणा किया– संयुक्त सचिव लव अग्रवाल - Ministry of Health & Family Welfare - Maulana Azad Road, New Delhi.

वेक्सिन की घोषणा किया– डायरेक्टर- ICMR (Indian Council of Medical Research) V. Ramalingaswami Bhawan, Ansari Nagar, N. Delhi.

वेक्सिन लगाने की देखरेख किया– डायरेक्टर, NHM– अपर्णा उपाध्याय - Vishal Complex, 19-A, Vidhan Sabha Marg, Lucknow.

वेक्सिन लगाया गया- गोविन्द हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर – 2/519, Ruchi Khand 2, Sharda Nagar Yojna, Lucknow.


अतः आपसे सादर अनुरोध है कि उपरोक्त कंपनी, संस्था, पदाधिकारियों के ऊपर अटूट श्रद्धा, विस्वास और निष्ठां होने के कारण मैंने एंटीबॉडी वेक्सिन कोविड शील्ड लगवाया था किन्तु वेक्सिन लगवाने के बाद निरंतर गिरते स्वास्थ से चिंतित होकर जब मैंने उपरोक्त जाँच 25 मई 2021 को करवाई तो मुझे ज्ञात हुआ कि वेक्सिन लगवाने के बाद भी मेरे शरीर में कोई एंटीबाडी नहीं बने हैं बल्कि मेरे मेरे प्लेटलेट की संख्या भी आधी से कम हो गई है, मेरा स्वास्थ दिन प्रतिदिन खराब होता मुझे प्रतीत हो रहा है, यह मेरे साथ विश्वसनीय कंपनी, संस्था, पदाधिकारियों द्वारा किया गया धोखाधड़ी है जिससे मेरी मृत्यु हो सकती है।

अतः मैं इस धोखाधड़ी और मेरे हत्या के प्रयास के लिए प्राथमिकी दर्ज करके उचित क़ानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें | आपकी महती कृपा होगी | थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए पीड़ित प्रताप चन्द्र के साथ सहयोगी अजय सिंह, वरिष्ठ वकील योगेश मिश्रा एवं अमित सचान भी मौजूद थे।

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