गलती हो जाने पर अपने को सही सिद्ध करने का प्रयास नही अपितु शुद्ध करने का प्रयास करो



अगर आप गलती करके स्वयं को सही सिद्ध करने का प्रयास करते हैं तो समय आपकी मूर्खता पर हंसेगा। गलती हो जाना तो मानव देह का स्वभाव है मगर गलती होने के बावजूद उसे स्वीकार न करना यह अवश्य एक कुभाव और दुर्भाव है। 

गलती पर गलती करने के बावजूद यदि दुर्योधन और रावण आदि ने स्वयं को सही सिद्ध करने का प्रयास न किया होता तो निश्चित ही वे जग हंसाई के पात्र बनने से बच जाते। 

जो लोग गलती को एक अवसर, एक सबक अथवा एक अनुभव के तौर पर लेना जानते हैं, निश्चित ही वो एक स्वर्णिम भविष्य की नींव भी रख देते हैं। अतः गलती हो जाने पर अपने को सही सिद्ध करने का प्रयास नही अपितु शुद्ध करने का प्रयास करो।

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