17वीं लोकसभा में बने कई रिकॉर्ड, चौथे सत्र में सबसे ज्यादा हुआ काम

17वीं लोकसभा के सभी सत्रों की बैठक कई मायनों में खास रही हैं। इस लोकसभा के चौथे सत्र में 167% फीसदी काम हुआ। यह लोकसभा के इतिहास में सर्वाधिक है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस उपलब्धि के लिए सभी सांसदों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों में सभी दलों ने देश एवं आमजन के हित के विषयों पर सुदीर्घ व स्वस्थ संवाद को प्रोत्साहित किया।
 
सदन के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सभी दलों के नेतागण व सांसदों के सहयोग से सदन में जनभावनाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति की परम्परा और मजबूत व सशक्त हुई। इस वक्त सदन में सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए 17वीं लोकसभा सक्रिय है। इस लोकसभा के पांचों सत्रों में प्रश्नकाल में औसतन 5.37 सवालों के जवाब दिए गए। जबकि 14वीं, 15वीं व 16वीं लोकसभा में यह संख्या कम रही रही। नियम 377 के तहत उल्लेखित विषयों में भी सरकार ने 89.2% सवालों के जवाब दिए। सदन में सदस्यों को अभिव्यक्ति के लिए पर्याप्त समय व अवसर मिले। पिछले पांच सत्रों के दौरान सदन में 712.93 घंटे कार्य हुआ।
 
इन सत्रों में 102 विधेयक संशोधन तथा 107 विधेयक पारित किए गए। सदन में 1744 सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया। यह 14वीं, 15वीं व 16वीं लोकसभा के मुकाबले ज्यादा है। 17वीं लोकसभा के दूसरे वर्ष में सांसदों के सहयोग से सदन की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अब तक आयोजित पांचों सत्रों की उत्पादकता 122.2% है। यह 14वीं, 15वीं व 16वीं लोकसभा के पांचों सत्रों से अधिक है। चौथे सत्र की 167% उत्पादकता लोकसभा के इतिहास में सर्वाधिक है। 17वीं लोकसभा में वित्तीय सुधारों पर बल देते हुए अनावश्यक खर्च कम किए गए। पहले वर्ष 151.44 करोड़ रूपए की बचत की गई। इस वर्ष बचत का आंकड़ा 249.54 करोड़ रहा, जो पिछले साल से करीब 100 करोड़ रूपए अधिक है।
 
भोजन पर सब्सिडी समाप्त कर प्रतिवर्ष 9 करोड़ की बचत सुनिश्चित की गई। कोविड के दौरान सांसदों ने राहत कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। सदस्यों ने स्वप्रेरणा से अपने वेतन में 30% कटौती की सहमति दी। ताकि उस राशि का उपयोग जनता की सहायता में किया जा सके। संसद भवन में स्थापित नियंत्रण कक्ष से सांसदों व आमजन की 24x7 सहायता की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था "लोकसभा" ने विगत दो वर्षों में जनता की उम्मीदों व आवश्यकताओं को जवाबदेही व पारदर्शिता के साथ पूरा किया। कोरोना की चुनौती के बीच सांसदों ने जहां अपने संवैधानिक दायित्वों को जिम्मेदारी से निभाया, वहीं आमजन की सहायता समर्पित भाव से की।

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