मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के डेल्टा प्लस वेरियंट से संक्रमित मरीज पाये जाने के दृष्टिगत अतिरिक्त सतर्कता बरतने के दिए निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के कई राज्यों में कोविड-19 के डेल्टा प्लस वेरियंट से संक्रमित मरीज पाये जाने के दृष्टिगत प्रदेश में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि डेल्टा प्लस वेरियंट की गहन पड़ताल के लिए अधिक से अधिक सैम्पल की जीनोम सिक्वेंसिंग करायी जाए। उन्होंने प्रदेश में जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा के लिए के0जी0एम0यू0, लखनऊ तथा बी0एच0यू0, वाराणसी में आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
 
मुख्यमंत्री आज यहां लोक भवन में आहूत एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में है। इसके बावजूद थोड़ी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इसके दृष्टिगत ‘ट्रेस, टेस्ट एण्ड ट्रीट’ नीति के अनुरूप कोविड-19 से बचाव और उपचार की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से जारी रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार डेल्टा प्लस वेरियंट के संक्रमण की तीव्रता पूर्व की अपेक्षा कहीं अधिक है। चिकित्सा विशेषज्ञों की राज्य स्तरीय सलाहकार समिति द्वारा इससे बचाव के सम्बन्ध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार अन्य आयु वर्ग की अपेक्षा यह वेरियंट बच्चों को कहीं अधिक प्रभावित कर सकता है। इसलिए चिकित्सा विशेषज्ञों के परामर्श के अनुरूप अविलम्ब सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। लोगों को सही एवं तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए जनजागरूकता के प्रयास किये जाएं।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेल, बस तथा हवाई जहाज से प्रदेश में आ रहे लोगों के सैम्पल लेकर जीनोम सिक्वेंसिंग करायी जाए। जनपदों में भी सैम्पल लिये जाएं। जांच परिणाम के अनुसार डेल्टा प्लस प्रभावी क्षेत्रों की मैपिंग करायी जानी चाहिए। इससे बचाव के प्रभावी प्रबन्ध सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। बैठक में अवगत कराया गया कि पिछले 24 घण्टों में कोरोना संक्रमण के 226 नये मामले सामने आये हैं। इसी अवधि में 320 संक्रमित लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किये गये हैं। कुल एक्टिव केस की संख्या 3,500 से भी कम होकर 3,423 रह गई है। विगत 24 घण्टों में 02 लाख 69 हजार 272 कोविड जांच की गईं। अब तक प्रदेश में 05 करोड़ 65 लाख 40 हजार 503 कोविड टेस्ट किये जा चुके हैं। वर्तमान में संक्रमण की रिकवरी दर 98.5 प्रतिशत है। कोविड-19 के खिलाफ जंग में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है। डबल मास्क, दो गज की दूरी, स्वच्छता और सैनिटाइजेशन जैसे कोविड बचाव सम्बन्धी व्यवहार को पूरी तरह अपनाना होगा। भीड़-भाड़ से बचना होगा। बैठक में अवगत कराया गया कि सीरो सर्वें के प्रारम्भिक परिणाम के अच्छे संकेत मिले हैं। शुरूआती नतीजों के मुताबिक सर्वेक्षण में लोगों में हाई लेवल एन्टीबाॅडी की पुष्टि हुई है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना से बचाव में टीकाकरण एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। इसलिए प्रदेश सरकार शुरू से ही कोविड वैक्सीनेशन का कार्य पूरी तत्परता से संचालित कर रही है। उन्होंने जून माह में 01 करोड़ वैक्सीन डोज एडमिनिस्टर किये जाने के लक्ष्य को महीने की समाप्ति के 06 दिन पूर्व, 24 जून, 2021 को ही प्राप्त किये जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए टीकाकरण कार्य पूरी तेजी से संचालित करने के निर्देश दिए। बैठक में अवगत कराया गया कि अब तक 02 करोड़ 90 लाख कोविड वैक्सीन की डोज एडमिनिस्टर की जा चुकी हैं। लगभग 42 लाख व्यक्त्यिों ने टीके की दोनों डोज लगवा ली हैं। उन्होंने ने कहा कि 01 जुलाई, 2021 से प्रत्येक दिन कम से कम 10 लाख कोरोना वैक्सीन डोज देने के लक्ष्य के साथ कार्य किया जाए। इस सम्बन्ध में शासन द्वारा कार्ययोजना निर्धारित की गई है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्र के लिए विकास खण्ड तथा शहरी क्षेत्र में शहरी निकाय को इकाई के रूप में चयनित करते हुए इन इकाइयों को क्लस्टर में विभाजित कर टीकाकरण किया जाएगा। वर्तमान में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर एक तिहाई विकास खण्ड को क्लस्टर में बांटकर ग्रामीण इलाकों में वैक्सीनेशन किया जा रहा है।
 
इस नीति के उत्साहजनक नतीजे मिल रहे हैं। उन्होंने आगामी माह से क्लस्टर आधारित टीकाकरण कार्यवाही पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीज का उपचार करना चिकित्सक का प्राथमिक एवं प्रमुख दायित्व है। इसी सेवा के लिए चिकित्सक अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। अन्य कार्यों में उनकी तैनाती चिकित्सकों को उनके मूल कर्तव्य से विमुख करती है। इसके दृष्टिगत उन्होंने निर्देशित किया कि विशेष पदों को छोड़कर चिकित्सालय प्रशासन एवं प्रबन्धन कार्यों में चिकित्सकों की तैनाती अपरिहार्य स्थिति में ही की जाए। चिकित्सालय प्रशासन एवं प्रबन्धन के कार्यों के लिये मास्टर इन हाॅस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन अथवा हाॅस्पिटल मैनेजमेंट के एम0बी0ए0 उपाधिधारक युवाओं को अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।
 
उन्होंने इस सम्बन्ध मंे विस्तृत कार्ययोजना तैयार किये जाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को मेडिकल आॅक्सीजन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रभावी प्रयास किये जा रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक जनपद के अस्पतालों में आॅक्सीजन प्लाण्ट की स्थापना की कार्यवाही गतिमान है। उन्होंने भारत सरकार के सहयोग से पी0एम0 केयर्स के माध्यम से निर्माणाधीन आॅक्सीजन संयंत्रों को स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त, 2021 तक क्रियाशील करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आॅक्सीजन प्लाण्ट की स्थापना का कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के लिये नोडल अधिकारी तैनात किया जाए। प्लाण्ट स्थापना की समस्त कार्यवाही की नियमित समीक्षा की जाए। बैठक में अवगत कराया गया कि प्रदेश में कार्यशील आॅक्सीजन प्लाण्ट की संख्या बढ़कर 114 हो गई है।

Popular posts from this blog

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आॅनलाईन ट्रांसफर सिस्टम विकसित किये जाने की प्रगति की समीक्षा बैठक की गई संपन्न

अनेक बातें जो हम समझ नहीं पाते

एकेटीयू में ऑफलाइन परीक्षा को ऑनलाइन कराए जाने के संबंध में कुलपति को सौंपा गया ज्ञापन