सनातन धर्म गङ्गा की तरह है


वर्तमान शंकराचार्य जी महाराज को लेकर आजकल खूब विवाद चल रहा है। वैसे शंकराचार्य को गाली देने वाले मूर्खों के बारे में मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूँ कि उन्हें न सनातन संस्कृति की समझ है, न लोक की, न ही धर्म की... 

सनातन धर्म गङ्गा की तरह है। इसमें किसी एक विचार की धारा नहीं बहती है, इसमें असँख्य नदियां आ आ कर मिलती हैं और सबके मिले जुले स्वरूप को गङ्गा कहते हैं। हमारे धर्म के भीतर भी सदैव से ही अनेक सम्प्रदाय एक साथ बहते रहे हैं। शैव भी, वैष्णव भी, शाक्त भी...यहाँ आत्मा और परमात्मा को एक मानने वाले अद्वैतवाद की भी प्रतिष्ठा रही है और दोनों को अलग मानने वाले द्वैतवाद की भी प्रतिष्ठा है। एक ही साथ चलते दो सम्प्रदायों की मान्यताओं में खूब अंतर्विरोध होता है, पर इसका अर्थ यह नहीं कि किसी एक विचार को मानने वाले दूसरों को गाली दें। यहाँ राम को पूजने वाले विशुद्ध वैष्णव गोस्वामी तुलसीदासजी मानस में अपने आराध्य से कहवाते हैं- "शिव द्रोही मम दास कहावा, सो नर मोहि सपनेहुँ नहीं भावा!" 

सम्भव है कि शंकराचार्य महाभाग जिस धारा के प्रतिनिधि हैं, वह आपको पसंद न हो! आप उनके विचारों को नहीं मानते हों! पर क्या इसका अर्थ यह है कि आप उन्हें गाली देंगे? आप चाहते हैं कि शंकराचार्य वह बोलें जो आप चाहते हैं! क्यों भाई? आपको अपने धर्म के अंदर चल रहे तीन सम्प्रदायों की पूजा पद्धति नहीं मालूम, और आप तय करेंगे कि शंकराचार्य को क्या बोलना चाहिए? आपको पता है कि कौन कौन से सम्प्रदाय पूजा के समय देवी को मदिरा अर्पित करते हैं? आपको पता है कि देश के किस हिस्से में कुलदेवता को मांस का भोग लगाया जाता है? नहीं न? और आप चले हैं शंकराचार्य को गाइड करने...जानते हैं स्वतंत्र भारत में पुलिस द्वारा किया गया सबसे बड़ा नरसंहार कौन सा है? 

स्वतंत्र भारत में सबसे बड़ा नरसंहार संतों का हुआ था, जब इंदिरा गांधी ने 1966 में पूज्य करपात्री जी महाराज की अध्यक्षता में चल रहे गोहत्या बन्द कराने के आंदोलन को कुचलने के लिए गोलियां चलवाई थीं। कहते हैं तब लगभग दो हजार साधुओं को गोली मारी गयी थी। पूछ कर देखिये अपने बुजुर्गों से, क्या कोई निकला था घर से उनके समर्थन में? एक आदमी भी? और आप कहते हैं कि शंकराचार्य बोलते क्यों नहीं, आंदोलन क्यों नहीं करते! इस देश की जो पुलिस बलात्कार के दस दस आरोपों के बाद भी किसी पादड़ी को छू नहीं पाती, वही एक फर्जी आरोप पर दस मिनट में ही कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी महाराज को कैद कर लेती है।

नौ वर्षों तक उनके विरुद्ध एक भी साक्ष्य नहीं मिला, पर केस चलता रहा और वे वर्षों तक बन्दी रहे। कैसे बोलें शंकराचार्य? भाई जी! धार्मिक संस्थाओं को कई बार निष्क्रिय दिख कर काम करना होता है। शंकर पीठ भी अपना काम कर रहे हैं। रोज शाम को एक बोतल दारू पी कर विमर्श ठेलने वालों को नहीं दिखेगा, देखने वाले देख रहे हैं पुनरुत्थान का संकेत! सबसे बड़े राज्य की सत्ता तक पहुँचे उस भगवाधारी को देख कर भी आपको भविष्य नहीं दिखता तो यह आपका दोष है, पर सच यही है कि युग बदल रहा है। दस वर्ष रुकिये, आपको हर राज्य में योगी आदित्यनाथ जैसे चेहरे दिखेंगे। दोष आपका नहीं है। सरस् सलिल के स्तर के पाठकों को उपनिषदों की बात समझ नहीं आती न! आप अपने हर पोस्ट में लिखते रहिये कि हिन्दुओं का अंत निकट है। घुइयां न उखड़ेगो... 

 

सर्वेश तिवारी श्रीमुख

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