अतुल्य गंगा परिक्रमा का हुआ समापन

प्रयागराज। मंडलायुक्त संजय गोयल और आईजी केपी सिंह पहुंचे मां गंगा के जल को निर्मल बनाने में लोगों को जागरूक करने और उनकी सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रयागराज से 16 दिसंबर 2020 को प्रयागराज से गंगोत्री तक गंगा किनारे वृक्षारोपण पदयात्रा शुरू की गई। अतुल्य गंगा परिक्रमा का प्रयागराज में बुधवार को समापन हो गया।

इस पदयात्रा की शुरुआत अतुल्य गंगा ट्रस्ट की ओर से हुई थी। इस उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में मंडलायुक्त संजय गोयल और आईजी केपी सिंह उपस्थित रहे। इस पदयात्रा में गंगा किनारे वृक्षमाल से जुड़े लोगों ने यात्रा पूरी करके राष्ट्रीय नदी गंगा की स्थिति के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर मंडलायुक्त संजय गोयल ने कहा कि गंगा नदी हमारे देश व हमारी संस्कृति की पहचान है साथ ही अमूल्य धरोहर भी है। इस पदयात्रा से देश में गंगा सहित सभी नदियों के लिए यह पर्यावरण संरक्षण के साथ ही सहभागिता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि गंगा को निर्मल बनाने के लिए इसके किनारे बस एक गांव के युवाओं को इस अभियान से जोड़ने की जरूरत है।

पदयात्रा पूरी करने वाले रोहित जाट और शगुन त्यागी को कमिश्नर संजय गोयल और आईजी के पी सिंह ने सम्मानित किया। इस यात्रा के दौरान पौधरोपण करने के लिए कामेश्वर मिश्रा और नितिन रंजन को भी सम्मानित किया गया। आयोजित कार्यक्रम में आईजी केपी सिंह ने कहा कि इस पदयात्रा में गंगा किनारे कराए गए वृक्षारोपण का कार्य प्रशंसनीय है। आज आवश्यकता केवल गंगा नहीं बल्कि गंगा बेसिन की है। सभी नदियों को स्वच्छ करने की है। इस दिशा में सतत प्रयास जारी है वह दिन दूर नहीं जब नदियां स्वच्छ होंगी। डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि हमने सुना था कि एक भागीरथ थे जिन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लेकर आए।

आज अतुल्य गंगा यात्रा में कई भागीरथ सामने हैं जो गंगा की निर्मलता और अविरलता पर चिंतन कर रहे हैं इसके लिए उन्होंने सभी को साधुवाद दिया। अतुल्य गंगा ट्रस्ट के संस्थापक गोपाल शर्मा सेवानिवृत्त कर्नल मनोज केश्वर ने बताया कि पांच हजार से ज्यादा किलोमीटर की यात्रा में गंगा किनारे हजारों पौधे लगाए गए। आसपास के लोगों को गंगा की सफाई के लिए प्रेरित किया। पदयात्रा में निकले लोगों में से कुछ ने बीमारी के कारण यात्रा बीच में छोड़ दी। दो लोगों ने यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया। गंगोत्री से गंगासागर तक प्रदूषित पानी गंगा में बहाया जा रहा है। अगर यह पानी शोधित करके छोड़ा जाए तो गंगा में गंदगी कम हो सकती है।

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