41 वर्ष बाद सेना कोर्ट से पीडिता को स्पेशल फेमिली पेंशन दिए जाने का आदेश

लखनऊ। लखनऊ, फर्रुखाबाद निवासिनी कलश कुमारी को उनके दिवंगत पति स्व० गनर जगदीश की स्पेशल फेमिली पेंशन 41 वर्ष पश्चात सेना कोर्ट लखनऊ द्वारा दिए जाने का आदेश न्यायमूर्ति उमेश चन्द्र श्रीवास्तव और वाईस एडमिरल अभय नाथ कार्वे की खण्ड-पीठ द्वारा सुनाया गया। मामला यह था कि पीडिता के पति 1971 में आर्टिलरी में भर्ती हुए थे।

वर्ष 1980 में पी०टी० के दौरान उनके सीने में तेज दर्द होने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उनको हार्ट फेल होने के कारण मृत घोषित कर दिया गया। वादिनी की स्पेशल फेमिली पेंशन भारत सरकार रक्षा-मंत्रालय द्वारा 1981 में ख़ारिज करते हुए 1982 में सामान्य फेमली पेंशन दी गई। पीडिता के अथक प्रयास के बावजूद सेना द्वारा यह कहकर उसकी मांग को नहीं माना गया कि उसके पति की मृत्यु सेना की ड्यूटी के दौरान नहीं हुई है। वर्ष 2016 में वादिनी की मुलाक़ात फर्रुखाबाद सैनिक कल्याण बोर्ड के डी०एस०यादव से हुई जिन्होंने पीडिता को आश्वस्त किया कि उसको न्याय दिलाने का प्रयास किया किया जाएगा, उसके बाद अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए 2016 में मुकदमा दायर किया।

भारत सरकार द्वारा 36 साल बाद मुकदमा दायर करने का जोरदार विरोध करते हुए वाद को तत्काल ख़ारिज किए जाने की मांग की और कहा गया न्याय पाने का अधिकार सिर्फ उन्हीं लोगों को है जो अपने अधिकार के प्रति सजग हों न कि अपनी सुविधानुसार कोर्ट आने वाले को, लेकिन वादिनी का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता विजय कुमार पाण्डेय ने दलील दी कि एक विधवा जिसकी आय का स्रोत न हो, कानूनी बारीकियों से परिचित न हो और लगभग अनपढ़ हो उसके पेंशन संबंधी मामले को ख़ारिज किया जाना न्यायोचित नहीं होगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया और मामले की सुनवाई की जिसमें भी भारत सरकार ने कहा कि वादिनी का पति ड्यूटी पर नहीं था, वह पी०टी० परेड में शामिल था।

इस पर वादिनी के अधिवक्ता द्वारा ड्यूटी की परिभाषा और स्पेशल फेमिली पेंशन संबंधी कानूनों का हवाला दिया और कहा इन सभी से साबित होता है कि वादिनी का मुकदमा स्वीकार किया जाए। खण्ड-पीठ ने सरकार की दलीलों को ख़ारिज करते हुए फैसला सुनाया कि वादिनी स्पेशन फेमिली पेंशन की हकदार हैं, उसके पति की मृत्यु सेना की ड्यूटी के दौरान हुई है और उसे पति की मृत्यु की तारीख 27.10.1980 से स्पेशल फेमिली पेंशन चार महीने के अंदर भारत सरकार प्रदान करे, यह भी कहा कि यदि नियत समय में भारत सरकार निर्णय पालन करने में असफल रहती है तो उसे 9 प्रतिशत व्याज भी वादिनी को देना होगा।

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