जो मनुष्य दूसरों का भला करके भूल जाते हैं, उनका हिसाब प्रकृति स्वयं याद रखती है


भला करो और भूल जाओ उचित समय आने पर प्रकृति स्वयं पुरस्कृत कर देगी। जो मनुष्य दूसरों का भला करके भूल जाते हैं, उनका हिसाब प्रकृति स्वयं याद रखा करती है। मगर जो मनुष्य आदतन अपने पुण्यों का बहीखाता लिये फिरते हैं, इस प्रकृति द्वारा फिर उनके पुण्य कर्मों को विस्मृत कर दिया जाता है

जो भी पुण्य आप द्वारा संपन्न किये जाते हैं, सत्य समझ लें यह प्रकृति निश्चित ही उन्हें संचित कर देती है और आवश्यकता पड़ने पर तुम्हारी विस्मृति के बावजूद भी उनका यथा योग्य फल अवश्य ही दे दिया करती है। याद रखना मनुष्य केवल खाता रख सकता है मगर उसका परिणाम घोषित नहीं कर सकता, वह अधिकार तो केवल और केवल इस प्रकृति के पास ही सुरक्षित है अतः भला करें और भूल जायें, उचित समय आने पर प्रकृति स्वयं पुरस्कृत कर देगी।

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