एक अभिमान के आने से ही अनेक दोष हमारे अंदर आ जाते हैं



जब मन मे अभिमान होता है तो द्वेष उत्पन्न होता है। अभिमान को जहाँ जिसके कारण ठेस लगती है उसके प्रति द्वेष पैदा हो जाता है।

हमारे भीतर थोड़ा सा भी द्वेष पैदा होता है तो समझ लीजिए कि अभी हम अभिमान से भरे हुए हैं। जहाँ समूल अभिमान निकल जाता है वहां द्वेष के लिए स्थान ही नहीं रहता। 

एक अभिमान के आने से ही अनेक दोष हमारे अंदर आ जाते हैं पहले द्वेष आता है फिर लोभ आ जाता है अतः अभिमान से बचो अभिमान ही पतन का कारण है।

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