आर्टस एण्ड कल्चर सोसाइटी के कलाकारों की प्रस्तुति

लखनऊ। संस्कृति के संरक्षण सर्वधन एवं विकास हेतु समर्पित ‘‘आर्टस एण्ड कल्चरल सोसायटी‘‘ लखनऊ के तत्वाधान में दिनांक 28 अगस्त 2021 (शनिवार) को सांय 5ः00 बजे से बरसाना उपवन, कल्याणपुर लखनऊ में भारतीय लोक संस्कृति, लोक परम्पराओं पर आधारित ‘‘भारतीय लोक सांस्कृतिक उत्सव‘‘ का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम का निर्देशन कामना बिष्ट द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन मुख्य अतिथि दुर्गेष्वर राय, महामंत्री, संस्कार भारती (अवध प्रांत) के कर कमलो द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया। इस अवसर पर सहकार भारती के प्रदेश महासचिव डा0 प्रवीण सिंह जादौन, हरीश चंद पंत, दीवान सिंह अधिकारी, धमेन्द्र सिंह, खुशहाल सिंह बिष्ट,वन्दना पाण्डेय, कमला मेहरा, शोभा रावत, चन्द्रा बिष्ट, गीता अधिकारी, शशि जोशी, सीता नेगी भाजपा कार्यकर्ती आदि मौजूद रही। संस्था की निर्देशिका कामना बिष्ट, सचिव सत्य प्रकाश सिंह द्वारा अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंटकर किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि ने कहा कि भारत की संस्कृति में सब कुछ है जैसे विरासत के विचार, लोगों की जीवन शैली, मान्यताएं रीति रिवाज मूल्य आदतें परवरिश  विनम्रता ज्ञान आदि।

भारत विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता का देश है, जहॉ लोग अपनी प्राचीन मानवता की संस्कृति और परवरिश का अनुकरण करते है। संस्था उसी का अनुकरण कर भारतीय पारम्परिक लोक संस्कृति को बढावा देती आ रही है उन्होने कलाकारों एवं संस्था को इस कार्य हेतु बधाई दी। आर्टस एण्ड कल्चरल सोसाइटी लखनऊ के कलाकारों ने भारतीय लोक सांस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। बंदना-नमो नमो शकरा शिव स्तुति, निर्देषन-कामना बिष्ट कलाकार-भूमिका पाण्डेय, धन्या पाण्डेय, गरिमा देवडी, गौरवी पाण्डेय,निहारिका, पंखुडी गुप्ता, यामिनी बिष्ट आदि। कथक नृत्य - बोल है- ओरे पिया एवं मोहे रंग दो लाल। पारम्परिक सामुहिक लोक नृत्य-वो कृष्णा है कलाकार है- आरोही वर्मा, अराध्या पंत, ओजस्वी त्रिपाठी आदि।

अवधी लोक गीत- बोल है नन्द रानो तेरो पलने में झूले ललना। कलाकार - अरूणा उपाध्याय।पारम्परिक सामुहिक लोक नृत्य - रंगीलो मारो ढोल ना- कलाकार है- मेहक षुक्ला, खुषी, दीपिका साहू, सलोनी शर्मा। पारम्पकि एकल गायन -जिसके बोल है राधा ने माला जपी श्याम  की लोक गायिका रितिका गुप्ता। अवधी भोजपुरी लोकगीत एवं लोक नृत्य- पिया मंहदी लेआदा कलाकार- आकांषा, रूपाली, शालनी, आख्या, गायन- यूपिका तिवारी।अमृत महोत्सव के अवसर पर देश  भक्ति गीत- केसरिया, कलाकार है- विनीत शुक्ला, ख़ुशी  महक, दीपिका एवं सलोनी। पारम्परिक सामुहिक नृत्य- बोल कान्हा सो जा जरा,कलाकार- भूमिका, गरिमा, गौरवी, निहारिका, पंखुडी, यामनी।

उत्तराखण्ड का पारम्परिक सामुहिक नृत्य- बडू पाको बारा मासा, कलाकार- भूमिका, गरिमा, गौरवी, निहारिका, पंखुडी, यामनी, धान्या, आरोही। एकल नृत्य-नैनो वाले ने- कलाकार यामनी बिष्ट।उत्तराखण्ड का सुप्रसिद्ध झोड़ा नृत्य जिसके बोल है ओ भिना भराडी बजारा-निर्देषन शशि जोशी , गायन में शशि जोशी, भवानी भोजक, राधा बोरा, नृत्य कलाकार, नीमा लटवाल, मीना फर्तियाल, गीता भैसोडा, दीप्ती बोरा, गीता भोजक, बीना बिष्ट, आयुशी  बोरा, गायत्री जोशी, लीला रावत आदि।पारम्परिक उत्तराखण्ड का एकल नृत्य- कलाकार स्नेहा बिष्ट। वाद्य कलाकार, विजय कुमार सिंह आर्गन पर, अभिषेक  श्रीवास्तव ढोलक पर, दुर्गेश  कुमार पैड पर, अरूणा उपाध्याय हारमोनियम पर।

रचनात्मक कार्य- राखी बनाओं प्रतियोगिता में प्रथम दिब्या प्रजापति, द्वितीय सुभी नायक,आयुष  सिंह मेहरा, तृतीय दृब्या पाण्डेय को संस्था की ओर से पुरस्कृत किया गया। कलाकारों को पुरस्कार/प्रमाण पत्र वितरण। अथितियों के कर कमलों द्वारा किया गया। अतं में अध्यक्ष महोदय ने सभी अतिथियों कलाकारो एवं प्रिंट मीडिया, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज का आभार व्यक्त किया गया।

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