गन्ना कृषकों के हितों को समाहित करते हुए पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ने के सट्टे एवं आपूर्ति की नीति जारी

लखनऊ। प्रदेश के गन्ना एवं चीनी आयुक्त संजय आर. भूसरेड्डी द्वारा पेराई सत्र 2021-22 के लिए गन्ने के सट्टे एवं आपूर्ति नीति जारी कर दी गई है। गन्ना आपूर्ति नीति के आधार पर ही प्रदेश के गन्ना कृषकों को गन्ने  के निर्गमन सहित आपूर्ति हेतु विस्तृत निर्देश चीनी मिलों को दिये जाते हैं।
 
भूसरेड्डी ने बताया कि गन्ना विकास विभाग द्वारा जारी इस वर्ष की सट्टा एवं आपूर्ति नीति में कृषक हितों के दृष्टिगत कई बदलाव किये गये हैं, जिनमें मुख्य रूप से भूमि क्रय-विक्रय के प्रकरणों में बेसिक कोटा हस्तान्तरण, उत्तम गन्ना कृषकों को उपज बढ़ोत्तरी हेतु निःशुल्क प्रार्थना-पत्र एवं सट्टाधारक सदस्य कृषक की मृत्यु पेराई सत्र के दौरान होने पर सट्टा चालू रखे जाने सम्बन्धी निर्णय गन्ना कृषकों के हितों में लिये गये हैं। इस वर्ष की आपूर्ति नीति में प्रति कृषक गन्ना सट्टे की सीमा सीमान्त कृषक (1 हेक्टेयर तक) के लिए अधिकतम 850 कु., लघु कृषक (2 हेक्टेयर तक) के लिये 1,700 कु. तथा सामान्य कृषक (5 हेक्टेयर तक) के लिये 4,250 कु. एवं उपज बढ़ोत्तरी की दशा में सट्टे की अधिकतम सीमा सीमान्त, लघु एवं सामान्य कृषक हेतु क्रमशः 1350 कु., 2,700 कु. तथा 6,750 कु. निर्धारित की गयी है।
 
गन्ना विकास विभाग द्वारा आपूर्तिकर्ता कृषकों की अधिकतम गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए गत दो वर्ष, तीन वर्ष एवं पांच वर्ष की औसत गन्ना आपूर्ति में से अधिकतम औसत गन्ना आपूर्ति को पेराई सत्र 2021-22 के लिए बेसिक कोटा माने जाने के निर्देश दिये गये हैं साथ ही जो कृषक पेराई सत्र 2020-21 में नये सदस्य बने हैं तथा एक वर्ष ही गन्ने की आपूर्ति किये है उनके एक वर्ष की गन्ना आपूर्ति को बेसिक कोटा माना जाएगा। भूमि क्रय-विक्रय के प्रकरणों में बेसिक कोटा भी नियमानुसार हस्तान्तरणीय (ज्तंदेमितंइसम) होगा। गन्ना एवं चीनी आयुक्त द्वारा बताया गया कि जिन किसानों के पास गन्ने की उपज क्राप कटिंग प्रयोगों की औसत उपज से अधिक है वे आवश्यकतानुसार उपज बढ़ोत्तरी हेतु अपने आवेदन पत्र निर्धारित शुल्क के साथ 30 सितम्बर, 2021 तक दे सकते हैं। उन्हांेने यह भी बताया कि इस वर्ष जो कृषक ड्रिप इरीगेशन पद्वति से सिंचाई करते हैं उनको अतिरिक्त सट्टे में प्राथमिकता दी जाएगी तथा अतिरिक्त सट्टे में अस्वीकृत गन्ना प्रजातियों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
 
कृषक से प्रशासनिक शुल्क के रूप में धनराशि की कटौती नहीं की जाएगी। ट्रेंच विधि से बुआई, सहफसली खेती एवं ड्रिप के प्रयोग एक ही खेत पर शुरू करने वाले चयनित ’’उत्तम गन्ना कृषकों’’ से उपज बढ़ोत्तरी के प्रार्थना-पत्र निःशुल्क प्राप्त किये जाएगें। यह भी बताया कि इस वर्ष समिति स्तरीय सट्टा प्रदर्शन के दौरान प्राप्त आपत्तियों के निस्तारण के उपरान्त अन्तिम कैलेण्डर ई.आर.पी. की वेब साइट बंदमनचण्पद एवं मोबाईल ऐप म्.ळंददं पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। किसानों हेतु ई.आर.पी. एवं मोबाईल ऐप पर अन्तिम कैलेण्डर का प्रदर्शन चीनी मिल चलने के एक सप्ताह पूर्व कर दिया जाएगा। कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था के अन्तर्गत कृषकों के लिए सुलभ स्थान पर एक अतिरिक्त टर्मिनल लगा कर पूॅछ-ताछ केन्द्र स्थापित किया जाएगा। गन्ना आपूर्ति के सम्बन्ध में कोई विशेष तात्कालिक समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में जिला गन्ना अधिकारी एवं क्षेत्रीय उप गन्ना द्वारा नियमानुसार समस्या का त्वरित निराकरण कराया जाएगा।
 
कृषकों को शिकायत निवारण प्रणाली के अन्तर्गत उत्कृष्ट सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से मुख्यालय स्तर पर एक कन्ट्रोल रूम की व्यवस्था की गयी है जिसमें स्थापित टोल फ्री नम्बर 1800-121-3203 पर कृषक सीधे अपनी शिकायतें दर्ज कराकर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। आयुक्त ने बताया कि गन्ना कृषकों की मांग के चलते इस वर्ष सट्टा नीति में यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि किसी सट्टाधारक सदस्य कृषक की मृत्यु पेराई सत्र के दौरान हो जाती है तो कृषक की आपूर्ति योग्य गन्ने की सामयिक खपत के दृष्टिगत उसका सट्टा चालू रखा जाएगा किन्तु यह सुविधा केवल वर्तमान पेराई सत्र 2021-22 हेतु ही मान्य होगी। सैनिकों, अर्द्धसैनिक बलों, भूतपूर्व सैनिकों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं उनके विधिक उत्तराधिकारियों को सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने पर गन्ना आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी।
 
आयुक्त ने बताया कि इस वर्ष जारी सट्टा नीति से डिजिटलीकरण को बढ़ावा मिलेगा। बिचौलियों का उन्मूलन होकर वास्तविक कृषकों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा तथा छोटे गन्ना कृषक अपना गन्ना समय से चीनी मिल को आपूर्ति कर सकेंगे एवं अस्वीकृत प्रजातियों के स्थान पर कृषक उन्नतिशील गन्ना प्रजातियों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।

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