हिस्ट्रीशीटर प्रकाश शुक्ला के इतिहास को खंगालेगी कैसरबाग पु​लिस

लखनऊ। नब्बे के दशक में स्पेशल टास्क फोर्स ने गा​जियाबाद बार्डर पर हिस्ट्रीशीटर प्रकाश शुक्ला का एन्काउटर कर अपनी ​पीठ भले ही थपथपाई हो। लेकिन आज भी लखनऊ पुलिस की केस डायरी में प्रकाश के अपराध का ब्यौरा मिसिंग है। जिसके चलते कोर्ट में गवाहों की गवाही नहीं हो पा रही है। लिहाजा कोर्ट ने डीएम, पु​लिस कमिश्नर और सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि कैसरबाग हत्याकांड केस की डायरी को अगली सुनवाई तक सुनिश्चित कराएं। इसके ​लिए कोर्ट ने 06 अक्टूबर तक मोह​लत दी है।

दरअसल सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, 01 अगस्त 1997 को गोरखपुर जनपद के देवेंद्र शुक्ला ने कैसरबाग कोतवाली में प्रकाश शुक्ला और उसके दो साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उस वक्त उन्होने प्रकाश शुक्ला के आंतक का ​​ज्रिक करते हुए कहा था कि, 31 जुलाई को वह अपने दोस्त के साथ कैसरबाग के एक होटल में ठहरे हुए थे। उनके होटल का कमरा 102 और 108 था। इसी बीच प्रकाश शुक्ला को भनक लग गई। वह उनकी ह​त्या करने के इरादे से  सुबह दस बजे अपने दो साथियों को लेकर होटल में पहुंच गया। डोर नॉक की आवाज पर उनके दोस्त ने होटल का कमरा खोला तो प्रकाश शुक्ला ने एके—47 और माउजर से ताबड़तोड़ फाय​रिंग कर दी। इस वारदात में देवेंद्र शुक्ला के साथी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत ​हो गई थी। बतातें चलें कि इस हत्याकांड में प्रकाश शुक्ला का नाम आने पर पुलिस टीम एक्टिव हो गई थी। विवचेना के बाद पुलिस ने 30 मई 1998 को हार्डकोर क्रिमिनल्स प्रकाश शुक्ला, नीलेंद्र पांडे और राजन तिवारी के ​विरूद्ध कोर्ट में जार्चशीट दाखिल की थी। लेकिन, 06 जून 2020 को कोर्ट ने इस हत्याकांड में शामिल नीलेंद्र पांडे को बरी कर दिया है।

जबकि उसके गैंग लीडर प्रकाश की शूटआउट में मौत हो चुकी है। बतातें चलेंकि अब यह मामला केवल राजन तिवारी चल रहा है। आज भी कैसरबाग कोतवाली की अपराध केस डायरी से इस हत्याकांड का ब्यौरा मिसिंग है। कोर्ट हर बार कैसरबाग पु​लिस से केस डायरी उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया। डायरी उपलब्ध न होने की वजह से गवाहों की गवाही नहीं हो पा रही है। इस पर विशेष न्यायधीश पवन कुमार राय ने डीएम अभिषेक प्रकाश, लखनऊ कमिश्नर डीके ठाकुर और सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि इस केस की अगली सुनवाई 07 अक्टूबर को होनी है। 06 अक्टूबर तक पुलिस हर हाल में केस डायरी सुनिश्चित कराए। साल 1998 को यूपी पुलिस के चुनिंदा अ​फसर को ध्यान में रखते हुए एक विशेष कार्य बल का गठन किया था। ​जिसे एसटीएफ यानि स्पेशल टास्क फोर्स के नाम से जानते हैं। स्पेशल टास्क फोर्स का मकसद था कि प्रदेश 43 कुख्यात अपराधियों को या तो पकड़ा जाए या मार दिया जाए।

सूची में प्रकाश शुक्ला का नाम सबसे ऊपर था। बतातें चलें​ कि प्रकाश शुक्ला की दहशत यूपी और बिहार चरम पर थी। साल 1996 में प्रकाश शुक्ला ने लखनऊ में राजनेता वीरेंद्र शाही की गोली मारकर  ह​त्या कर दी थी। इसके बाद 26 मई 1997 को प्रकाश शुक्ला ने कुनाल रस्तोगी का अपहरण कर लिया था। कुनाण एक बड़े व्यापारी का बेटा था। जून 1998 को प्रकाश शुक्ला ने बिहार के मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसका नाम सुर्खियों में आने लगा था। प्रकाश शुक्ला की मौत के बाद यूपी पुलिस ने भी राहत की सांस ली थी। इसके बाद बॉलीवुड जगत ने प्रकाश की दशहत को बड़े पर्दे पर बखूबी से दर्शाया है। साल 2005 प्रकाश ​बॉयोग्राफी पर गई ​फिल्म सहर और साल 2018 में आई रंगबाज वेबसीरिज को दर्शकों ने भी काफी पंसद किया था। इन बायोग्राफी का उदृेश्य अपराध को बढ़ाव देना नहीं बल्कि अपराध और अपराधियों के बुरे परिणाम को बताया गया है।

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