"विषय" बाहर रहते हैं और "विकार" हमारे भीतर


जब जब विषय शब्द आता है तो उसके साथ विकार शब्द भी जुड़ा होता है। "विषय विकार मिटाओ" विषय विकार एक शब्द नहीं है ये दो शब्द हैं विषय अलग है और विकार अलग शब्द है। विषय बाहर रहते हैं और विकार हमारे भीतर रहते हैं।

जब जब बाहर के विषय और हमारे अंदर के विकार एक साथ मिल जाते हैं तो हमारे संतत्व को नष्ट कर देते हैं। यदि हमारे अंदर के विकार दूर हो जाय तो बाहरी विषय हमारा कुछ भी न बिगाड़ पायेंगे। अतः अपने अंतःकरण को मनमोहन से जोड़ दो जिससे कि कोई भी विकार आपके अंदर उत्पन्न ही न हो।

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