वसुधा एव कुटुम्बकम्- धरती ही परिवार है

 
हिंदुत्व एक विचारधारा है जबकि हमारा मूल धर्म सनातन है। हम जिस वसुधैव कुटुम्बकम् की बात कहते हैं वह सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा उसकी एक विचारधारा है जो महा उपनिषद सहित कई ग्रन्थों में लिपिबद्ध है। इसका अर्थ है- धरती ही परिवार है (वसुधा एव कुटुम्बकम्)। यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित है।
 
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥
 
(महोपनिषद्, अध्याय ४, श्‍लोक ७१) अर्थ- यह अपना बन्धु है और यह अपना बन्धु नहीं है, इस तरह की गणना छोटे चित्त वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों की तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार है। वसुधैव कुटुम्बकम का यह अर्थ कतई नही है कि हिंदूवादी लोग पूरी दुनियां में कब्जा कर लेंगे या दुनियां उनकी है। आतंकी ट्रेनिंग कैंप में इस तरह की अंट शंट व्यख्या बताकर हिंदुत्व विचारधारा को बदनाम किया जाता है। यह अनुचित है। बिना पूरी जानकारी के मनमाना अर्थ लगाकर दुष्प्रचार नही करना चाहिए। हिंदुत्व का अर्थ है बन्धुता, हिंदुत्व का अर्थ है समरसता, हिंदुत्व का अर्थ है सभी को साथ लेकर चलने का संस्कार।
 
वैदिक काल में भारतीय उपमहाद्वीप के धर्म के लिये 'सनातन धर्म' नाम मिलता है। 'सनातन' का अर्थ है शाश्वत या 'हमेशा बना रहने वाला' अर्थात् जिसका न आदि है न अन्त। सनातन धर्म मूलतः भारतीय धर्म है, जो किसी समय पूरे बृहत्तर भारत (भारतीय उपमहाद्वीप) तक व्याप्त रहा है। विभिन्न कारणों से हुए भारी धर्मान्तरण के बाद भी विश्व के इस क्षेत्र की बहुसंख्यक आबादी इसी धर्म में आस्था रखती है। "यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों ! आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें।” (ऋग्वेद-3-18-1) हमारे ऋषि-मुनियों ने ध्यान और मोक्ष की गहरी अवस्था में ब्रह्म, ब्रह्मांड और आत्मा के रहस्य को जानकर उसे स्पष्ट तौर पर व्यक्त किया था। वेदों में ही सर्वप्रथम ब्रह्म और ब्रह्मांड के रहस्य पर से पर्दा हटाकर 'मोक्ष' की धारणा को प्रतिपादित कर उसके महत्व को समझाया गया था। मोक्ष के बगैर आत्मा की कोई गति नहीं इसीलिए ऋषियों ने मोक्ष के मार्ग को ही सनातन मार्ग माना है।
 
 
-निखिलेश मिश्रा

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