तालिबान के रूप में एक नया खतरा आ गया है सामने

 
कल सर संघ चालक मोहन भागवत ने विजयादशमी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि हमें हिन्दू संस्कृति की रक्षा करते हुए पाकिस्तान चीन और अब तालिबान जैसे पड़ोसियों की गतिविधियों पर भी पूरी तरह ध्यान केंद्रित करना है। विजयादशमी के सुअवसर पर आर एस एस प्रमुख विभिन्न मुद्दों पर राष्ट्र के समक्ष अपनी बात रखते आये हैं, यह एक परंपरा है, जब संघ प्रमुख राष्ट्र की चेतना और हिन्दू संस्कृति के मूल तत्वों के परिलरेक्ष्य में समाज को जागृत करते हैं। आज के समय में जब भारत विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना कर रहा है, ऐसे में उनके संबोधन का अति विशिष्ट महत्व है डा मोहन भागवत ने स्नात्तन धर्म के मूल तत्वों की ओर ध्यान दिलाते हुए याद दिलाया कि हम विश्व बंधुत्व में विश्वास करते हैं किन्तु हमें पड़ोसी देशों के आचरण पर ध्यान तो केंद्रित करना ही होगा।
 
पाकिस्तान और चीन से खतरा तो रहता ही आया है, पर अभी एक नया खतरा तालिबान के रूप में सामने आ गया है इस ओर मोहन भागवत ने राष्ट्र का ध्यान आकर्षित किया हमें अपनी पुरातन संस्कृति और मूल्यों की रक्षा तो करनी ही है राष्ट्र की सीमाओं पर चल रही गतिविधियों को भी देखते रहना है। वास्तुतः अभी आये हुए संकटों पर मोहन भागवत का मार्गदर्शन सरकार और अपने समाज के लिए महत्वपूर्ण है जाति और धर्म के बीच एक दीर्घकालिक समन्वय की ओर आर एस एस प्रमुख का ठोस इशारा था। संघ परिवार भारतीय समाज और हिन्दू धर्म के प्रसंगों पर अपनी निर्णायक भूमिका में सदा रहता है आर एस एस को मालूम है कि भारत के लोकतंत्र की रक्षा में हिंदुओं की भूमिका सर्वोपरि है हम तो ऐसा मानते हैं कि जब हिन्दू की भूमिका को दबाने की कोशिश हुई लोकतंत्र कमजोर हुआ आज अपने अपने ढंग से संघ और सरकार संस्कृति की रक्षा करने और सीमाओं पर सजग रहने का अभियान चला रही है।
 
उस क्रम में इस बार का विजयादशमी संबोधन कुछ अलग महत्व का है वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को एक अग्रणी मूल विचार के रूप में स्वीकारते हुए हमें राष्ट्र और धर्म को संरक्षित करने में लगे रहना होगा हमारा देश पूर्णतः सुरक्षित रहेगा और हमारी संस्कृति की जड़ें मजबूत बनी रहेंगी तभी तो विश्व बंधुत्व के कॉन्सेट को हम आधार दे सकते हैं। आर एस एस प्रमुख ने कश्मीर का भी जिक्र अपने संबोधन में किया कहा कि प्रदेश में सुव्यवस्था के ठोस प्रयत्न हो रहे हैं। ३७०, ३५ए हटने के बाद स्थितियां बदली हैं देश प्रेम भी बढा है हाल की आतंकी घटनाओं की ओर इशारा तो उन्होंने किया पर आशावादी नायक की तरह जनमानस को प्रोत्साहित किया। संघ हमारी राष्ट्रीय चेतना को विकसित करता है संघ हमारे धर्म की रक्षा में मूल्यवान योगदान करता है। संघ हनारा विश्वास है हमारा भरोसा है। हम कृतज्ञ हैं संघ के राष्ट्रवादी सरकार और राष्ट्रीय विचारों की पोषक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमारा सुरक्षा कवच है।

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