केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने सार्वजनिक खरीद और परियोजना प्रबंधन में सुधार के लिए दिशा-निर्देश किए जारी

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने आज एक वर्चुअल कार्यक्रम में सार्वजनिक खरीद और परियोजना प्रबंधन में सुधार के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। इन दिशा-निर्देशों को तैयार करने और जारी किए जाने को, मौजूदा नियमों तथा प्रक्रियाओं की समीक्षा की निरंतर प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। माननीय प्रधानमंत्री ने इस वर्ष अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया था। कैबिनेट सचिव द्वारा 2 अक्टूबर, 2021 से 31 अक्टूबर, 2021 के दौरान एक विशेष अभियान के तहत इसकी निगरानी की जा रही है। इस वर्चुअल कार्यक्रम में वित्त सचिव एवं व्यय विभाग के सचिव डॉ. टी वी सोमनाथन और व्यय विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सार्वजनिक खरीद और परियोजना प्रबंधन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक विस्तृत परामर्श प्रक्रिया के बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के तत्वावधान में इन दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार किया गया था। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (डीओई) को, मंत्रालयों/विभागों से सुझाव आमंत्रित करने और इन पर विस्तृत विचार करने के बाद दिशा-निर्देश जारी करने के लिए नामित किया गया था। इन दिशा-निर्देशों में, भारत में सार्वजनिक खरीद तथा परियोजनाओं के तेज, कुशल और पारदर्शी क्रियान्वयन के नए नियमों को शामिल करने तथा जनहित में त्वरित और अधिक कार्यकुशल निर्णय लेने के लिए कार्यान्वयन एजेंसियों को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया है। सुधारों में बकाया धनराशि के भुगतान के लिए तय समयसीमा निर्धारित करने को भी शामिल किया गया है। तदर्थ भुगतान (तैयार बिलों का 70 प्रतिशत या अधिक) को समय पर जारी करने से ठेकेदारों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए नकदी में सुधार होने की उम्मीद है।

सरकार द्वारा डिजिटल प्रक्रिया को प्रोत्साहन देने के क्रम में, कार्यों की प्रगति को रिकॉर्ड करने के लिए एक साधन के रूप में इलेक्ट्रॉनिक माप पुस्तकों को प्रस्तावित किया गया है। दिशा-निर्देशों में प्रस्तावित अन्य आईटी आधारित समाधानों के साथ, यह प्रणाली; कुशल डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने, ठेकेदारों को तेजी से भुगतान की सुविधा प्रदान करने और विवादों को कम करने में सहायक होगी। ठेकेदारों के चयन के लिए वैकल्पिक तरीकों की अनुमति दी गई है, जिससे परियोजनाओं के निष्पादन की गति और दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है। उपयुक्त मामलों में, पारंपरिक एल1 प्रणाली के विकल्प के रूप में, गुणवत्ता सह लागत आधारित चयन (क्यूसीबीएस) के माध्यम से, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके को अपनाते हुए प्रस्ताव के मूल्यांकन के दौरान गुणवत्ता मानकों को महत्व दिया जा सकता है।

सार्वजनिक परियोजनाओं को समय पर, मंजूर की गयी लागत के भीतर और अच्छी गुणवत्ता के साथ क्रियान्वित करना हमेशा एक चुनौती रही है। जैसे-जैसे आर्थिक विकास की गति तेज होती है, प्रक्रियाओं और नियमों की सावधानीपूर्वक जांच आवश्यक है, ताकि करदाता के पैसे के मूल्य में वृद्धि के लिए नए नवाचारों का उपयोग हो सके तथा अनावश्यक बाधाओं को दूर किया जा सके। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी), नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) और राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (नीति) आयोग ने सार्वजनिक खरीद और परियोजना प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं और नियमों का विस्तृत विश्लेषण किया था तथा वर्तमान एवं भविष्य की सार्वजनिक खरीद संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीति में बदलाव का सुझाव दिया था।

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